- इंदौर पिंक पैंथर्स मध्य प्रदेश लीग (MPL) T20-2026 में चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ उतरने को तैयार; टीम ने अपनी सोच और तैयारियों का रोडमैप साझा किया
- द क्रश कॉफी पर अब होगा खास संडे ब्रन्च
- जल, जीवन और जमीन के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण आवश्यक : डॉ. ए.के. द्विवेदी
- Triptii Dimri Dives into Comedy with Maa Behen! A Full-Blown Comedy Caper Coming Up Next?
- The Rise of Ram Charan as Indian Cinema’s Complete Hero
MIT-WPU में हुआ NSRTC 2025 का आयोजन, इनोवेशन के ज़रिये 2047 के विज़न को साकार करने के लिए भारत के दिग्गज वैज्ञानिक एकजुट हुए
पुणे, जुलाई, 2025: आज एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की महानिदेशक, डॉ. एन. कलईसेलवी ने राष्ट्रीय वैज्ञानिक गोलमेज सम्मेलन (NSRTC) 2025 के दूसरे संस्करण का औपचारिक उद्घाटन किया। तीन दिनों का यह कार्यक्रम 18 से 20 जुलाई तक चलेगा, जिसमें विज्ञान तथा टेक्नोलॉजी के अहम क्षेत्रों में संवाद, आपसी सहयोग और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए भारत के जाने-माने वैज्ञानिक, शिक्षा जगत के दिग्गज और शोधकर्ता एकजुट होंगे।
IIT कानपुर के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के पूर्व सचिव, पद्मश्री प्रो. डॉ. आशुतोष शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी मौजूदगी से उद्घाटन कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस कार्यक्रम में सी-डैक के संस्थापक-निदेशक एवं नालंदा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, पद्म भूषण डॉ. विजय पी. भटकर भी शामिल हुए।
इस साल का सम्मेलन पाँच अहम विषयों: यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैटेरियल्स एवं प्रोसेसिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, एनर्जी एवं सस्टेनेबिलिटी, तथा हेल्थकेयर, फार्मा व बायोटेक्नोलॉजी पर केंद्रित है। इसके अलावा, इसके साथ ही, नोबेल पुरस्कार से जुड़े कार्यों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएँगे।
उद्घाटन समारोह के दौरान, भारत के जाने-माने एस्ट्रोफिजिसिस्ट में से एक, स्वर्गीय डॉ. जयंत नार्लीकर को मरणोपरांत विज्ञान महर्षि पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के तहत 5 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है, जो उनकी बेटी डॉ. लीलावती नार्लीकर को दिया गया। उन्होंने अपने पिता की कुछ दिल को छू लेने वाली बातें भी साझा कीं और कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए सबसे प्यारा और बहुत ही खास सम्मान है, जो विज्ञान को सरल और सुलभ बनाने के उनके सपने को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
CSIR की महानिदेशक, डॉ. एन. कलईसेलवी ने अपने मुख्य संबोधन में कहा, “आइंस्टीन जैसे नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने कहा था कि सत्य ही विज्ञान है, और टैगोर का मानना था कि विज्ञान ही सत्य है, लेकिन MIT-WPU में आकर मैं यह कहना चाहूँगी कि विज्ञान शांति भी है। भारत धीरे-धीरे अपने 2047 के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, और यह बात तो साफ है कि आने वाले समय में विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन ही हमारे देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे। अब छात्रों की सोच में भी बदलाव आया है जिसे देखकर वाकई प्रेरणा मिलती है, क्योंकि वे अब सिर्फ नौकरी नहीं ढूंढ रहे हैं, बल्कि स्टार्टअप शुरू करके दूसरों को भी रोज़गार दे रहे हैं। चुपचाप आने वाला यह बदलाव विज्ञान की वजह से ही संभव हुआ है, और इसे बढ़ावा देना बहुत ज़रूरी है।”
उन्होंने आगे कहा, “NSRTC जैसे मंच होनहार युवाओं को भारत के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे संवाद, मेंटरशिप और दूर की सोच को बढ़ावा मिलता है। इस तरह की पहल बहुत ज़रूरी हैं, ताकि नई पीढ़ी खुद से सोचकर और भारत को ध्यान में रखकर असल दुनिया की समस्याओं के समाधान ढूंढ सके।”
प्रो. डॉ. आशुतोष शर्मा ने कहा, “MIT-WPU की ओर से आयोजित यह सम्मेलन विज्ञान और टेक्नोलॉजी के सबसे अहम क्षेत्रों को एक मंच पर लाने की दिशा में एक शानदार कदम है। नोबेल पुरस्कार जीतने वाले इनोवेशन, एआई और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर हो रही बातचीत यह दर्शाती है कि, अलग-अलग विषयों में सहयोग ही भविष्य में आगे बढ़ने का रास्ता है। आज, कोई भी विषय अकेले इन कठिन समस्याओं को नहीं सुलझा सकता। युवाओं को यह समझना होगा कि भारत को अपने समाधान खुद ही बनाने होंगे, जो हमारी ज़मीनी हकीकत से जुड़े हों, न कि बस किसी और की नकल हों। विज्ञान और टेक्नोलॉजी ही हमारे भविष्य का आधार हैं, और वास्तविक समस्याओं को सुलझाने से ही असली सीख मिलती है। अब समय आ गया है कि हम हिम्मत के साथ और रचनात्मक तरीके से सोचें, और लीक से हटकर कुछ अलग कर दिखाएँ।””
MIT-WPU के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल वी. कराड ने अपने स्वागत संबोधन में कहा, “हम मानते हैं कि रिसर्च ही देश के विकास की बुनियाद है। NSRTC के ज़रिए, हमारी कोशिश है कि हम होनहार युवाओं को मौलिक सोच के लिए प्रेरित करें, ताकि वे विज्ञान और इनोवेशन में अपने करियर को शानदार बना सकें। आज भी, भारत GPS जैसी बेहद महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है, और हमें इसे बदलना होगा। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि, इस प्लेटफ़ॉर्म पर 600 से ज़्यादा छात्रों ने देश भर के 100 से ज़्यादा जाने-माने वैज्ञानिकों के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई।”
इस मौके पर डॉ. विजय पी. भटकर ने कहा, “इस आयोजन में होनहार युवाओं के साथ-साथ शोधकर्ता और देश के बड़े-बड़े वैज्ञानिक एकजुट हुए हैं, ताकि इंजीनियरिंग, लाइफ साइंसेज और भौतिक विज्ञान जैसे अलग-अलग विषयों में बड़े बदलाव लाने वाले विचारों का आदान-प्रदान हो सके। इस तरह के सहयोग से ही वास्तव में बदलाव लाना संभव है। हम मानते हैं कि, यह मंच नई सोच का आधार बनेगा, जिससे विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के सफर को एक नई दिशा मिलेगी।””
MIT-WPU के संस्थापक अध्यक्ष, डॉ. विश्वनाथ डी. कराड ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमें देश भर के वैज्ञानिकों और विचारकों के इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेज़बानी का अवसर मिला है। इसका नाता सिर्फ रिसर्च और टेक्नोलॉजी से ही नहीं है, बल्कि यह सम्मेलन आपसी तालमेल बनाने, विचारों का आदान-प्रदान करने और भारत में विज्ञान के भविष्य के लिए एक मज़बूत बुनियाद तैयार करने के लिए है।””
इन सभी सम्मानित अतिथियों के अलावा, इस सम्मेलन में 36 शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार विजेता, कई INSA पुरस्कार विजेता, प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं के निदेशक, शिक्षा जगत के जाने-माने दिग्गज तथा विभिन्न अनुसंधान एवं औद्योगिक क्षेत्रों के वरिष्ठ वैज्ञानिकभी भाग ले रहे हैं।
अगले दो दिनों तक, प्रतिभागियों को IISc, IITs और दूसरे प्रमुख संस्थानों के पुरस्कार विजेता शोधकर्ताओं और अमेरिका व यूरोप के अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों के साथ अलग-अलग विषय पर आधारित सत्रों, विशेषज्ञों से बातचीत और आपसी चर्चाओं में शामिल होने का अवसर मिलेगा।


