रामायण के प्रीमियर पर शीना चौहान ने नितेश तिवारी द्वारा सीता के नए रूप की कल्पना और महाकाव्य की महिला पात्रों के सशक्त चित्रण की सराहना की।

सीता से पार्वती और अवली तक: रामायण के भव्य प्रीमियर के बाद शीना चौहान ने आध्यात्मिक सिनेमा के बढ़ते प्रभाव का किया स्वागत।

शीना चौहान ने रामायण के विशेष प्रीमियर में शिरकत की, जिसमें आलिया भट्ट और रकुल प्रीत सहित फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं। इस अवसर पर अभिनेत्री ने भारतीय कहानी कहने की परंपरा, हमारे इतिहास और हमारी शाश्वत सच्चाइयों को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँचते देख गहरा गर्व व्यक्त किया। शीना चौहान ने नितेश तिवारी की परिकल्पना को पर्दे पर साकार होते देखने और महाकाव्य की महिला पात्रों के सशक्त चित्रण पर अपने विचार साझा किए।

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प्रश्न: इस रामायण में सीता के चित्रण में आपको सबसे खास क्या लगा?

“हम सीता को बचपन से ही त्याग, शक्ति और भक्ति की प्रतिमूर्ति के रूप में देखते आए हैं। नितेश तिवारी की रामायण में सीता को एक योद्धा राजकुमारी के रूप में नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना मुझे विशेष रूप से रोमांचित करता है। उनका साहस, शक्ति और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता इस चरित्र के एक नए पहलू को सामने लाती है। यह उस चरित्र का एक ताज़गी भरा और सशक्त रूप है, जिसने पीढ़ियों को प्रेरित किया है।”

प्रश्न: इतने भव्य सिनेमाई कैनवास पर रामायण को देखना आपका अनुभव कैसा रहा?

“भारतीय कहानी कहने की परंपरा से मेरा पहला परिचय रामायण के माध्यम से हुआ था। इसलिए इस कालजयी महाकाव्य को इतने भव्य पैमाने पर जीवंत होते देखना मेरे लिए बेहद खास अनुभव था। मैं विशेष रूप से नितेश तिवारी की परिकल्पना और इस कहानी को प्रस्तुत करने के उनके दृष्टिकोण से प्रेरित हुई। हमारी संस्कृति में इतनी गहरी जगह रखने वाली इस कथा के महिला पात्रों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना भी सराहनीय है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि हमारी पौराणिक कथाओं को इतनी बड़ी सिनेमाई महत्वाकांक्षा के साथ दुनिया के सामने लाया जा रहा है।”

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि भारतीय सिनेमा में आध्यात्मिक और पौराणिक कहानियों के प्रति एक नया आकर्षण देखने को मिल रहा है?

“बिल्कुल! मुझे लगता है कि आज दर्शक केवल मनोरंजन से आगे बढ़कर ऐसी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो उन्हें कुछ गहरा अनुभव कराती हैं। सिनेमा के प्रति एक नई सराहना देखने को मिल रही है, जो लोगों को उनकी जड़ों, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ता है। इस दौर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इन कहानियों में सशक्त महिला पात्र भी प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। रामायण में सीता से लेकर हनुमान अंश में पार्वती और मूकुथी अम्मन 2 में महाशक्ति तक, हम महिलाओं को अद्भुत साहस, दृढ़ विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति के साथ चित्रित होते देख रहे हैं।”

प्रश्न: स्वयं एक आध्यात्मिक पृष्ठभूमि वाली फिल्म का हिस्सा रह चुकी हैं। इस बढ़ती लहर में आपको सबसे अधिक क्या उत्साहित करता है?

“मेरे लिए इसकी सबसे खूबसूरत बात यह है कि ये कहानियाँ हर पीढ़ी के दर्शकों तक पहुँच रही हैं। चाहे पौराणिक सिनेमा हो, भक्ति पर आधारित फिल्में हों या हमारी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित कहानियाँ, लोग इनके भावनात्मक पहलुओं और मूल्यों से जुड़ रहे हैं। संत तुकाराम जैसी आध्यात्मिक और भक्तिमय फिल्म में अवली का किरदार निभाते हुए मैंने स्वयं इस जुड़ाव को महसूस किया है। यह उत्साहजनक है कि अधिक से अधिक फिल्म निर्माता इस क्षेत्र में इतने जुनून और भव्यता के साथ काम कर रहे हैं।”

प्रश्न: रामायण और इस महत्वाकांक्षी प्रयास के पीछे पूरी टीम के लिए आप क्या कहना चाहेंगी?

“मेरा मानना है कि रामायण सिर्फ एक फिल्म से कहीं बढ़कर है। यह हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और हमारी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करती है। साथ ही, यह भारतीय सिनेमा के स्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने और हमारी कहानियों को पूरी दुनिया तक पहुँचाने का एक प्रयास है।

मैं इस दिव्य प्रयास के लिए पूरी टीम को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ और सकारात्मक ऊर्जा देना चाहती हूँ। आइए, हम सब एकजुट होकर ऐसे प्रयास का समर्थन करें, जो हमारी कहानियों, हमारी संस्कृति और हमारे गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाता है।”

संत तुकाराम में अवली से लेकर अपनी आगामी बायोपिक में लिलिथ, एक शैतानी स्त्री, तक शीना चौहान ने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए हैं। वह लगातार ऐसे किरदारों को तलाश रही हैं जो चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ दर्शकों को प्रेरित भी करें। अपने अभिनय में भावनात्मक गहराई और तीव्रता के लिए पहचानी जाने वाली शीना भविष्य में और भी जटिल, सशक्त और अर्थपूर्ण किरदार निभाने के लिए उत्सुक हैं।

शीना के लिए रामायण को देखना भारतीय कहानियों और अविस्मरणीय किरदारों की उस शाश्वत शक्ति की याद दिलाता है, जो पीढ़ियों तक लोगों को प्रेरित कर सकती है, उनका मनोबल बढ़ा सकती है और उनके दिलों को छू सकती है

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