पहली राजस्थानी पैन-इंडिया फिल्म ‘धूड़’ का टीज़र हुआ रिलीज़ – राजस्थान से बड़े पर्दे पर एक सिनेमाई थ्रिलर के लिए हो जाइए तैयार

जयपुर: कलाम अकादमी और समर जैन प्रस्तुत ‘धूड़’ (Sandstorm), सोल ऑफ डेजर्ट प्रोडक्शन की स्टूडियो ऐनक के सहयोग से बनी फिल्म है। यह फिल्म देशभर में रिलीज़ होने वाली पहली राजस्थानी फिल्म होने का गौरव हासिल करती है। हाल ही में हुई घोषणा ने फिल्म के विषय और इसकी दुनिया को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा कर दी है।

आज निर्माताओं ने फिल्म का आधिकारिक टीज़र जारी किया है, जो दर्शकों को #Dhood की दुनिया की एक झलक देता है। ‘धूड़’ दशकों बाद राजस्थान से आने वाली एक प्रमुख पैन-इंडिया रिलीज़ के रूप में सामने आ रही है। यह फिल्म राजस्थान सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो राजस्थान की मिट्टी, संस्कृति और आत्मा से जुड़ी एक बड़े पैमाने की कहानी को देशभर के दर्शकों तक पहुंचा रही है।

आनंद सिंह चौहान द्वारा लिखित और निर्देशित ‘धूड़’ (Sandstorm) एक पीरियड ड्रामा है, जो 90 के दशक की शुरुआत के दौर में राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखते हुए ड्रामा, शानदार अभिनय और संगीत का संगम पेश करती है। टीज़र की झलकियों के अनुसार, फिल्म एक पारंपरिक समाज में परिवार की वंश परंपरा को आगे बढ़ाने की चाह, लालच, सत्ता और हताशा के जटिल ताने-बाने को एक मनोरंजक थ्रिलर के रूप में प्रस्तुत करती है।

फिल्म में यशपाल शर्मा, अलका अमीन और भवानी सिंह चौहान प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि विवेक पारेख, प्रवीण चौधरी और वानिक्की त्यागी इस फिल्म के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रख रहे हैं। फिल्म के संगीत और साउंडट्रैक की रचना ‘हेल्लारो’ फेम मेहुल सुरती ने की है।

टीज़र फिल्म की उस रॉ और वास्तविक दुनिया की भी झलक दिखाता है, जिसे पहली बार इस तरह बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जा रहा है और जो दर्शकों से जुड़ने का वादा करती है।

समर जैन, नरेंद्र कृष्णिया, मुकेश पारेख, डी. एस. चौहान और अभिषेक चोपड़ा द्वारा निर्मित ‘धूड़’ (Sandstorm) का उद्देश्य राजस्थानी कहानी कहने की समृद्ध परंपरा को क्षेत्रीय सीमाओं से आगे ले जाकर देशभर के दर्शकों तक पहुंचाना और इसे पैन-इंडिया सिनेमाघरों में प्रस्तुत करना है, जिसे मिराज सिनेमाज का समर्थन प्राप्त है।

यह फिल्म राजस्थान में और देशभर के चुनिंदा सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी, ताकि राजस्थानी जड़ों से जुड़े उन दर्शकों तक पहुंच सके, जो ऐसी सिनेमाई अनुभूति की तलाश में हैं, जो उन्हें अपनी लगे और उनकी विरासत से उनका जुड़ाव और मजबूत करे।

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