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रील्स देखकर कोलोन क्लीनिंग कराना गलत है, इसके लिए डॉक्टरी सलाह जरुरी
वर्ल्डकॉन 2026 के अंतिम दिन हुआ सीनियर डॉक्टर्स का सम्मान
इंदौर। इन दिनों इंटरनेट पर कोलोन क्लीनिंग को लेकर काफी रील्स चल रही है। सिर्फ रील्स या विज्ञापन देखकर इसे करवाना गलत है। डॉक्टर्स सिर्फ मेडिकल एमरजेंसी या फिर टेस्ट करवाने के लिए ही कोलोनल क्लीनिंग की सलाह देते हैं। इसे बिना मेडिकल सलाह के बार-बार करवाने से आपको इसकी आदत हो जाएगी और आपके नार्मल मोशन में दिक्क्त होगी। यह जानकारी इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कोलोप्रॉक्टोलॉजी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस वर्ल्डकॉन 2026 के अंतिम दिन यह जानकारी ब्रम्हपुरी महाराष्ट्र से आए आईएससीपी के प्रेसिडेंट डॉ लक्ष्मीकांत लाडूकर ने दी। उन्होंने कहा कि हमारे पारंपरिक भोजन और इंडियन स्टाइल टॉयलेट सबसे बेस्ट थे, इन बीमारियों से सुरक्षा के लिए। इसी तरह साफ-सफाई के लिए भी भारतीय तरीका ही सही है, जिसमें बहुत सारे पानी का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार लाइफस्टाइल बदलने के साथ यह बीमारियां बढ़ी जरूर है पर वर्षों से यह बीमारियां मौजूद थी। सुश्रुता संहिता में भी इन बीमारियों का वर्णन मिलता है।
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ ईशान चौरसिया इस चार दिन की कांफ्रेंस में सिर्फ पाईल्स फिशर और फिश्टूला ही नहीं बल्कि यहां रेक्टर कैंसर, कोलोनल कैंसर और पायलोनिडल साइनस जैसी कई गंभीर बीमारियों पर भी चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस का समापन वेलेडेटरी फंक्शन के साथ हुई। कांफ्रेंस के अंतिम दिन विशेष अतिथि के रूप में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अरविंद घनघोरिया मौजूद थे। इस मौके पर डॉ सतीश शुक्ला, डॉ विनोद भंडारी और डॉ दिलीप आचार्य का सम्मान भी किया गया। डॉ ईशान चौरसिया अब आईएससीपी के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किए गए।
स्मोकिंग से नहीं होते क्लियर मोशन
डॉ लक्ष्मीकांत ने कहा कि मोशन क्लियर करने के लिए स्मोकिंग या तम्बाकू का इस्तेमाल करना सिर्फ साइकोलॉजिकल है, लोगों को इस आदत में बदलाव करने की जरूरत है। कुछ दिन इसके लिए प्रयास करेंगे तो खुद-ब-खुद आपकी आदतों में परिवर्तन आएगा। इसी तरह भोजन करते ही वाशरूम जाना भी गलत है और थोड़े प्रयास से इस आदत को भी बदला जा सकता है। ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ मयंक गुप्ता ने कहा कि भारतीय खान-पान में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है इसलिए हर दिन सुबह उठकर तय समय पर फ्रेश होने जाना ही सही है। विदेशों में जहां ज्यादा प्रोसेस फूड और मैदा खाया जाता है, वहां लोग दो या तीन दिन में एक बार मोशन के लिए जाते हैं।
चार दिन में सीखी नवीनतम तकनीकें
जीएमसी मंदसौर की डीन डॉ. शशि गांधी ने कहा कि मेडिकल साइंस तेजी से बदल रहा है और हर दिन नई तकनीकें सामने आ रही हैं। ऐसे में इस तरह की कॉन्फ्रेंस ज्ञान अपडेट करने का प्रभावी माध्यम बनती हैं। वर्ल्डकॉन के चार दिवसीय सत्रों में सर्जरी के वीडियो के साथ एक्सपर्ट फैकल्टी का मार्गदर्शन मिला, जिससे न केवल स्टूडेंट्स बल्कि प्रैक्टिस कर रहे सर्जनों को भी नई चीजें सीखने का अवसर मिला।


