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लाप्रोस्कोपिक सर्जन को ओपन सर्जरी की भी महारत होनी चाहिए
12 बेसिक से एडवांस लाप्रोस्कोपिक सर्जरी का हुआ लाइव प्रदर्शन
इंदौर. आज के समय में देखा जा रहा है नई पीढ़ी के डॉक्टर लाप्रोस्कोपी सर्जरी सिख रहे है लेकिन ओपन सर्जरी में उनका हाथ बेहद कमजोर है. लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में किसी भी तरह की जटिलता आने पर उसे तुरंत ओपन करने में समझदारी है.
यह कहना है आईएजीएस, एमपीएएसआई और एएसआई इंदौर सिटी चैप्टर द्वारा संयुक्त रूप से बेसिक टू एडवांस्ड मिनीमल एक्सेस सर्जरी विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेन्स में आये विशेषज्ञों का. कांफ्रेंस में मध्य भारत के तकऱीबन 150 सर्जन और ओटी टेक्निशन ने हिस्सा लिया. कांफ्रेंस में अप्पेंडिसक्टोमी, कोलेक्सोटोमी, टेप, हर्निया सर्जरी और ब्रियाटिक सर्जरी आदि विशेषज्ञों ने नौ तकनीक के साथ कर के दिखाई.
ऑर्गनाइजि़ंग चेयरपरसन डॉ अमिताभ गोयल ने बताया कि लाप्रोस्कोपिक सर्जरी में नित नई आधुनिक तकनीक जुडती जा रही है इस तरह की कांफ्रेंस नई तकनीको की जानकारी देने के साथ सर्जरी में एक्सपर्ट बनाने में मद्ददगार सिद्ध होती है. हम नए सर्जन को ट्रेंनिंग के माध्यम से बताना चाह रहे है की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को बेहद सफाई से करना चाहिए और जरासा खतरा भाप्पने पर तुरंत ओपन सर्जरी कर के केस को संभाले.
ऑर्गनाइजि़ंग सेक्रेटरी डॉ अपूर्व चौधरी ने बताया कांफ्रेंस को शुरुआत मुंबई से डॉ रमन गोयल द्वारा की गई मोटापे की स्लीव सर्जरी के सीधे प्रसारण से हुई। डॉ गोयल ने पेट को छोटा कर के उस पर बैंड लगाने की तकनीक लेप्रोस्कोपी में सिखाई इस तकनीक के बाद दोबारे मोटे होने की सम्भावना काफी कम हो जाती है। डॉ राजीव जैन और डॉ अंकुर महेश्वरी ने हॉस्पिटल से होटल के हॉल में सीधा प्रसारण में विशेष सहयोग दिया।
हर्निया के लिए लेप्रोस्कोपी सर्जरी ही फायेदेमंद है
मुंबई मैक्स हॉस्पिटल से आये डॉ राजेश खुल्लर ने हर्निया की सर्जरी में लेप्रोस्कोपी तकनीक के फायदे बताते हुए कहा हर्निया में पेट की टिशु कमजोर हो जाती है ऐसे मैं जिस जगह के टिशु स्वस्थ देखते है उस जगह से लेप्रोस्कोप डाल कर कम क्षति पहुचाते हुए मैश डाली जाती है इस तरह से हर्निया में रिकवरी जल्दी हो जाती है और कमजोर टिशु को रिकवर होने का समय मिल जाता है।


