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फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के इलाज में आएंगे नए बदलाव, इंदौर में जुटेंगे दुनिया भर के विशेषज्ञ
चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक, टीबी, अस्थमा, फेफड़ों के संक्रमण और क्रिटिकल केयर पर होगा मंथन
इंदौर, 30 जून 2026। बदलती जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण, धूम्रपान की आदत, संक्रमण और टीबी जैसी बीमारियों के कारण फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में मरीजों तक बेहतर और आधुनिक इलाज पहुंचाने के उद्देश्य से देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत सहित दुनिया के कई देशों के श्वसन रोग विशेषज्ञ, पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरैसिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सक शामिल होंगे। कॉन्फ्रेंस का मुख्य आयोजन ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा, जबकि इसकी शुरुआत 3 जुलाई को प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप के साथ होगी।
कॉन्फ्रेंस में फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, टीबी, अस्थमा, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ नवीनतम शोध, अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन और उपचार पद्धतियों को साझा करेंगे ताकि देशभर के डॉक्टर अपने मरीजों को और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सकें।

बीडब्ल्यूसी 4 के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस केवल डॉक्टरों का वैज्ञानिक आयोजन नहीं बल्कि मरीजों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, “फेफड़ों की बीमारियां आज केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और बदलती जीवनशैली के कारण युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। हमारा उद्देश्य दुनिया भर के विशेषज्ञों के अनुभव और नवीनतम वैज्ञानिक शोध को एक मंच पर लाकर ऐसी जानकारी साझा करना है, जिससे डॉक्टरों को आधुनिक उपचार पद्धतियां सीखने का अवसर मिले और अंततः इसका लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचे। चिकित्सा विज्ञान लगातार बदल रहा है और ऐसे वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस डॉक्टरों को नई तकनीकों से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष कॉन्फ्रेंस की सबसे बड़ी विशेषता प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप होंगी। कुल 11 विशेष वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी, जिनमें इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी की पांच एडवांस्ड वर्कशॉप के अलावा पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, सीवियर अस्थमा, टीबी, पल्मोनरी रिसर्च और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहेंगे। इन वर्कशॉप में प्रतिभागियों को केवल व्याख्यान ही नहीं बल्कि आधुनिक उपकरणों के उपयोग, जटिल प्रक्रियाओं और क्लिनिकल मैनेजमेंट का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत में टीबी नियंत्रण अभियान, नई राष्ट्रीय गाइडलाइन, अत्याधुनिक जांच तकनीकों, दवा प्रबंधन, ड्रग रेजिस्टेंट टीबी और जटिल मरीजों के उपचार पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। यह सत्र विशेष रूप से उन चिकित्सकों के लिए उपयोगी रहेगा जो टीबी मरीजों का नियमित उपचार करते हैं।
तीन दिनों तक चलने वाले इस कॉन्फ्रेंस में पल्मोनरी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, थोरैसिक सर्जरी, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, रेस्पिरेटरी रिसर्च और ब्रोंकोपल्मोनरी रिहैबिलिटेशन जैसे विषयों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी अपने अनुभव साझा करेंगी। इसके अलावा देश के विभिन्न भागों से श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक स्नातकोत्तर छात्र अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। वहीं 30 से अधिक टीमें क्विज प्रतियोगिता में भाग लेंगी। कॉन्फ्रेंस के दौरान रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, इंटरएक्टिव सेशन और नेटवर्किंग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे युवा डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर मिलेगा।
आयोजन समिति में देश के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रो. महेंद्र के. बैनारा कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन हैं, जबकि डॉ. अपार जिंदल साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। डॉ. सलील भार्गव और डॉ. लोकेन्द्र दवे कॉन्फ्रेंस के पैट्रन हैं। आयोजन समिति का मानना है कि चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए यह कॉन्फ्रेंस देश के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आयोजनों में से एक साबित होगा।
डॉ. रवि डोसी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के लिए अर्ली बर्ड रजिस्ट्रेशन शीघ्र शुरू किया जाएगा। देशभर के डॉक्टर, रेजिडेंट्स, मेडिकल स्टूडेंट्स और अन्य हेल्थ प्रोफेशनल्स आधिकारिक वेबसाइट [www.bwcindore.com] के माध्यम से पंजीकरण कर सकेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, उत्कृष्ट आतिथ्य और चिकित्सा क्षेत्र में इंदौर की मजबूत पहचान के कारण यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए यादगार अनुभव साबित होगा।


