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शालिनी ताई मोघे की पुण्यतिथि पर शिक्षा और समाजसेवा पर मंथन, भारती ठाकुर ने ग्रामीण विकास का मॉडल किया साझा
बाल निकेतन संघ की दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ, जनजातीय बच्चों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर
इंदौर, 30 जून 2026। पद्मश्री स्वर्गीय शालिनी ताई मोघे की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बाल निकेतन संघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ मंगलवार को पागनीस पागा स्थित बाल निकेतन संघ परिसर में हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, समाजसेवा और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। समाजसेवी, शिक्षाविद, विद्यार्थी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य शालिनी ताई मोघे के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा समाज में सेवा और संवेदनशीलता की भावना को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता नर्मदालय की संस्थापक भारती ठाकुर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह व्यक्ति को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और समाज के प्रति उत्तरदायी भी बनाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में काम करते हुए यह अनुभव हुआ कि यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल विकास का अवसर मिले तो वे अपने जीवन की दिशा स्वयं बदल सकते हैं। उन्होंने समाज के सक्षम वर्ग से आग्रह किया कि वे गांवों और वंचित समुदायों के बच्चों की शिक्षा से जुड़कर सामाजिक परिवर्तन की इस यात्रा में सहभागी बनें।
भारती ठाकुर ने अपने संगठन निमाड़ अभ्युदय रूरल मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (नर्मदा) के कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2010 में नर्मदा परिक्रमा पूर्ण करने के बाद उन्होंने खंडवा और खरगोन अंचल के जनजातीय एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा और समग्र ग्रामीण विकास का अभियान शुरू किया। वर्तमान में संस्था लेपा पुनर्वास, भट्टियां और छोटी खरगोन में तीन निःशुल्क आवासीय विद्यालय संचालित कर रही है, जहां 230 से अधिक बच्चों को शिक्षा के साथ बढ़ईगिरी, विद्युत कार्य, प्लंबिंग, कृषि, संगीत, योग और ध्यान जैसे व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य बच्चों को केवल शिक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और संस्कारित नागरिक बनाना है।
उन्होंने बताया कि संस्था का विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल टेक्नोलॉजी ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुख तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। वहीं “स्किल्स ऑन व्हील्स” यानी कौशल्य रथ पहल के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक मोबाइल कौशल प्रशिक्षण पहुंचाया जा रहा है, ताकि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके अलावा संस्था ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्थानीय शिक्षिका के रूप में तैयार कर रही है, जिससे शिक्षा और महिला सशक्तिकरण दोनों को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है।
बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा, “शालिनी ताई मोघे का जीवन सेवा, शिक्षा और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने ऐसे समय में बाल शिक्षा और महिला विकास के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया था, जब इन विषयों पर पर्याप्त चर्चा भी नहीं होती थी। उनके प्रयासों ने हजारों बच्चों और महिलाओं के जीवन को नई दिशा दी तथा समाजसेवा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया।उनकी स्मृति में आयोजित यह व्याख्यान श्रृंखला समाज में सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व को मजबूत करने का माध्यम है। भारती ठाकुर जैसी समाजसेवी के अनुभवों ने आज उपस्थित सभी लोगों को यह विश्वास दिलाया कि समर्पित प्रयासों से ग्रामीण भारत में व्यापक परिवर्तन संभव है।”
व्याख्यान श्रृंखला का दूसरा सत्र 1 जुलाई को प्रातः 10:30 बजे आयोजित होगा। इसमें लक्ष्य फाउंडेशन, पुणे की संस्थापक अनुराधा प्रभुदेसाई मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। वे भारतीय सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों के सम्मान, सहयोग तथा युवाओं में राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने के अपने अनुभव साझा करेंगी।


