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तीन सप्ताह से ज्यादा घुटना दुर्द हो तो तुरंत ले डॉक्टर की सलाह
इंडियन बायोलॉजिकल आर्थापीडिक सोसायटी की दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का समापन
इंदौर। वर्तमान समय में घुटनो के दर्द के मामले तेजी से बढ रहे है। कई लोग बगैर सोचे समझे दर्द निवारक तेज , या जेल का उपयोग कर लेते है इससे कुछ समय के लिए दर्द तो चला जाता है लेकिन बीमारी अंदर ही अंदर बढती रहती है और बाद में घुटना बदलवाने की नौबत आ जाती है।
उपरोक्त विचार कस्तुरबा मेडीकल कॉलेज मणिपाल कर्नाटक से आए एक्सपर्ट डॉ किरण आचार्य ने इंडियन बायोलॉजिकल आर्थापीडिक सोसायटी (आईबॉस) की दो दिवसीय नेशनल ‘बॉयलाजी इज द न्यू टेक्नॉलाजी’ को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।
उन्होने घुटनों के दर्द के लिए आर्थांस्कोपिक ट्रीटमेंट की होल के बारे में बताते हुए कहा कि शुरूआती दौर का आर्थोराइटिस इस तकनीक से पुरी तरह ठीक हो सकता है लेकिन लोग विज्ञापनों के प्रभाव में आकर बगैर किसी सलाह के दर्द निवारक उत्पाद, जेल, तेल आदि का उपयोग कर अपनी बीमारी को बढा लेते है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्गनाईजिंग सेक्रेटरी डॉ विनय तंतुवाय ने कहा कि अर्ली स्टेज में 100 मे से केवल 15 लोग ही जोडो के दर्द पर डॉक्टर के पास सलाह लेने जाते है। जोडो की सुरक्षित बनाए रखने के लिए चाहिए की इसका ध्यान खुद रखे क्योंकि ये पुरे जीवन आपका साथ देगे।
कांफ्रेंस के समापन के मौके पर फ्री पेपर सेशन का आयोजन भी किया गया। जिसमें कई फेकल्टीज व एक्सपर्ट ने जोडो के दर्द के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के समापन के मौके पर सोसायटी के प्र्रेसीडेंट डॉ एम एस ढिल्लन, आर्गनाइजिंग कमेटी के चेयरमेन डॉ पंकज व्यास, सेक्रेटरी डॉ विनय तंतुवाय, डॉ तन्मय चौधरी, सांइंटिफिक कमेटी के चेयरमेन डॉ शीतल गुप्ता की मौजूद थे। समापन के मौके पर देशभर से आए प्रतिभागियों को सर्टीफिकेट प्रदान किये गए। इंडियन बायोलॉजिकल आर्थापीडिक सोसायटी ( आईबॉस ) की अगली कांफ्रेस मणिपाल में होगी ।


