- Vivriti Asset Management Marks Successful Exit of Vintage II funds; ₹3,400 crore returned since inception
- विवृति एसेट मैनेजमेंट ने विंटेज-II फंड्स से सफलतापूर्वक किया एग्जिट
- DBS Bank India enables Customs Duty, Central Excise and Service Tax payments through ICEGATE 2.0
- Madhya Pradesh Well Positioned to Drive India's Next Wave of Growth: Mr Vir S. Advani, Chairman, CII Western Region
- भारत की विकास यात्रा के अगले चरण को गति देने के लिए मध्य प्रदेश पूरी तरह तैयार: श् वीर एस. आडवाणी, चेयरमैन, सीआईआई पश्चिमी क्षेत्र
केयर सीएचएल हॉस्पिटल इंदौर में 49 वर्षीय महिला के इन्सीजनल हर्निया का लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से हुआ उपचार
इंदौर। हर्निया का बार-बार लौटना सर्जनों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। खासकर तब, जब मरीज पहले कई बार ऑपरेशन करा चुका हो। ऐसा ही एक मामला केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर में सामने आया, जहां 49 वर्षीय महिला के चौथी बार हुए जटिल इन्सीजनल हर्निया का लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से उपचार किया गया। महिला मरीज करीब 20 सेंटीमीटर की पेट की सूजन के साथ अस्पताल पहुंची थीं। उनकी पहले तीन बार हर्निया की सर्जरी हो चुकी थी। इसके अलावा उन्हें कई बार आंतों में रुकावट (सब-एक्यूट इंटेस्टाइनल ऑब्स्ट्रक्शन) की समस्या भी हुई थी। जांच में दोबारा हुए इन्सीजनल हर्निया की पुष्टि हुई, जिसमें आंतें हर्निया की थैली के भीतर पहुंच चुकी थीं।
सीईसीटी स्कैन में करीब 6.5 × 12.5 सेंटीमीटर का बड़ा हर्निया और उसके आसपास कई छोटे-छोटे फेशियल डिफेक्ट दिखाई दिए, जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में “स्विस चीज़ डिफेक्ट” कहा जाता है। इस तरह के मामलों में सामान्यतः ओपन सर्जरी की जाती है, जिसमें पेट पर बड़ा चीरा लगाकर आंतों को अलग किया जाता है, मांसपेशियों की मरम्मत की जाती है और मेष लगाई जाती है।
इस मामले में मरीज का उपचार लैप्रोस्कोपिक तकनीक से किया गया। सर्जरी के लिए केवल तीन छोटे छिद्र बनाए गए। इसके माध्यम से आंतों को आसपास के ऊतकों से अलग कर उनकी सामान्य स्थिति में स्थापित किया गया। ऑपरेशन के दौरान एक बड़े और कई छोटे हर्निया डिफेक्ट की मरम्मत की गई। इसके बाद सभी डिफेक्ट को ढकने के लिए 20 × 15 सेंटीमीटर और 12 × 12 सेंटीमीटर आकार की दो कम्पोजिट मेष लगाई गईं।
केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर के सीनियर कंसल्टेंट लैप्रोस्कोपिक, जीआई, बैरिएट्रिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. अचल अग्रवाल ने बताया कि बार-बार होने वाले इन्सीजनल हर्निया के मामलों में उपचार की योजना मरीज की स्थिति, पहले हुए ऑपरेशन और हर्निया के आकार के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ चयनित मरीजों में लैप्रोस्कोपिक तकनीक भी प्रभावी विकल्प हो सकती है। इससे बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और मरीज अपेक्षाकृत कम समय में सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकता है।


