- एमबीबीएस की बढ़ती कटऑफ से घबराएं नहीं, आयुष में भी करियर के बेहतरीन अवसर : डॉ. ए.के. द्विवेदी
- मथुरा-वृंदावन में पारिस्थितिक बहाली और जैव विविधता संवर्द्धन के लिए हार्टफुलनेस संस्थान और यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद (UPBTVP) का सहयोग
- Aamir Khan, Anushka Sharma to Saqib Saleem: Actor-Producers Who Took Self-Authored Creative Risks
- Mrunal Thakur to Raashii Khanna: Actresses Who Drip in Gold
- लॉक अप सीज़न 2 में होस्टिंग से अर्जुन कपूर ने जीता दर्शकों का दिल, एक फैन ने लिखा, "सबसे अच्छे होस्ट वही होते हैं जो बातचीत का हिस्सा लगते हैं, उसे कंट्रोल करने की कोशिश नहीं करते।"
‘क्यों उत्थे दिल छोड़ आए’ में एक खास रोल निभाएंगी वैष्णवी
मुम्बई. पॉजिटिव रोल्स से लेकर नेगेटिव रोल्स तक, ऐसा कुछ नहीं है जो हमारी चहेती वैष्णवी नहीं कर सकतीं। अब एक्ट्रेस वैष्णवी सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के आगामी शो ‘क्यों उत्थे दिल छोड़ आए’ में ज़ाहिदा के रोल में नजर आएंगी। इस एक्ट्रेस ने टेलीविजन इंडस्ट्री में मां के रोल के लिए कुछ खास मापदंड स्थापित कर दिए हैं और अब इस शो में वे एक बार फिर वाश्मा की मां के रोल में नजर आएंगी।
जहां मांएं अपने बच्चों को लेकर पजेसिव होती हैं, वहीं वैष्णवी का किरदार तो जरूरत से ज्यादा पजेसिव है। वो मानती हैं कि उनकी बेटी को सही उम्र में शादी करके अपना घर बसा लेना चाहिए, लेकिन वो ये नहीं जानतीं कि वाश्मा के तो कुछ और ही सपने और अरमान हैं। एक मां के रूप में उन्हें अपने बेटे से ज्यादा लगाव है।
ऐसी थी 1940 के दशक की विचारधारा, जब देश आजादी की हवा में सांस लेने ही वाला था। ‘क्यों उत्थे दिल छोड़ आए’, 1947 में भारत के बंटवारे से पहले लाहौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें अमृत, वाश्मा और राधा नाम की तीन लड़कियों की कहानी है। ये तीनों आजादी की कगार पर अपने सपनों, उम्मीदों, अरमानों और नए-नए प्यार के सफर पर निकलती हैं।
अपने किरदार के बारे में बताते हुए वैष्णवी कहती हैं, “मैं अपने किरदार ज़ाहिदा से पूरी तरह अलग हूं। 1940 के दौर में महिलाओं की मानसिकता बहुत अलग थी। उस जमाने में जो लड़कियां सपने देखने की हिम्मत करती थीं, उनके पंख कतर दिए जाते थे। वैष्णवी का अपने बेटे की तरफ ज्यादा रुझान है जबकि वो अपनी बेटी को लेकर ज्यादा पजेसिव हैं।
क्यों उत्थे दिल छोड़ आए, देश के बंटवारे से पहले के दौर की कहानी है, जिसमें अमृत, वाश्मा और राधा एक नए कल के सपने देखती हैं। इन लड़कियों की कहानी देखना बड़ा प्रेरणादायक अनुभव होगा, जिन्होंने सपने देखने का साहस किया। यह कहानी 21वीं सदी की लड़कियों को भी प्रेरित करेगी।”


