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हस्त नक्षत्र व साध्य योग में मनेगी नागपंचमी
यह पर्व नागों के साथ जीव सम्मान, संवर्धन व संरक्षण की प्रेरणा भी देता है।

इंदौर. इस वर्ष सावन का पूरा महीना विशेष योग-संयोगमें मनाया जा रहा है. रविवार फल द्वितीया से प्रारंभ सावन रविवार को रक्षा बंधन के साथ पूरा होगा. श्रावण शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है. पंचमी तिथि के स्वामी स्वयं नाग देवता ही है. 13 अगस्त शुक्रवार को नागपंचमी पर्व हस्त नक्षत्र व साध्य योग में कल्कि जयंती के साथ मनाया जाएगा.
यह बात भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान के शोध निदेशक आचार्य पण्डित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कही. आचार्य शर्मा ने बताया कि सम्पूर्ण भारत विशेषकर देश के पर्वतीय प्रदेशों में नागपूजा अत्यंत उत्साह व धार्मिक विधि विधान से मनाई जाती है. शुक्रवार को पंचमी तिथि दोपहर1.42 बजे तक रहेगी. हस्त नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक व साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा. सामान्यतः नागपूजा प्रातः काल में ही की जाती है. आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि नागों का मूल पाताल लोक माना जाता है. भोगवतीपुरम इसकी राजधानी के नाम से प्रसिद्ध है. धर्मशास्त्रीय गर्न्थो में नागों का उदगम महर्षि कश्यप व उनकी पत्नी कद्रू से माना जाता है. सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नागों को आनन्द प्रदान करने वाली है. नाग पंचमी के दिन नाग नागिन के जोड़े को गोदुग्ध से स्नान कराने का विधान है. मालवा में अनेक घरों में आज के दिन चूल्हे पर तवा नहीं चढ़ाया जाता है. घरों में दाल,बाटी व चूरमा भोग के रूप में बनाया जाता है. धूप ध्यान के साथ दाल बाटी का भोग भी नाग देवता को लगता है.
नागों के चित्र की पूजा का ही है विधान
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि नागपंचमी को नागों का धार्मिक विधि से चित्रांकन किया जाता है. स्वर्ण, रजत,लकड़ी अथवा पवित्र मिट्टी के नाग बनाकर उनकी सविधि विविध पूजा उपचारों से पूजन करने की शास्त्र आज्ञा है.
पर्यावरण में नागों की महती भूमिका
आचार्य शर्मा ने बताया कि हमारी भारतीय संस्कृति में नाग को देवता के रूप में स्वीकार किया गया है. गणेशजी व शिवजी के गले की शोभा ही नाग देवता है. विष्णु भगवान का सम्बंध शेष शय्या से है. पुराणों में सूर्य के रथ में 12 नागों का उल्लेख प्राप्त होता है आदि. ये सभी नाग की देवता के रूप में ही पुष्टि करते है. हमारा चिंतन प्राणी मात्र में आत्मा व परमात्मा के दर्शन कर एकता का अनुभव करता है. नाग देवता हमारी कृषि सम्पदा की कृमिनाशक जीव जंतुओं से रक्षा करते है साथ ही पर्यावरण रक्षा के साथ साथ वनसम्पदा में भी नागों की अहम भूमिका मानी गयी है।


