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“एक नाम से काम नहीं होगा : 25–50 वर्षों की जल चुनौती के लिए आज से सामूहिक प्रयास जरूरी — डॉ. ए.के. द्विवेदी”
इंदौर। भीषण गर्मी और पानी की बढ़ती किल्लत को मानव जीवन के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए डॉ. ए.के. द्विवेदी, सदस्य, सीसीआरएच, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर ने सभी नागरिकों से जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए सामूहिक जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि आज की पानी की समस्या के समाधान के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे काफी देर से शुरू हुए हैं। अब केवल वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाले 25–50 वर्षों की जल चुनौती के बारे में आज से ही गंभीरता से सोचना होगा। यह किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि यदि समय रहते प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट की भयावह परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों में केवल सजावटी पौधों तक सीमित न रहें, बल्कि आम, जामुन, बेल जैसे फलदार वृक्षों के साथ नीम, पीपल और बरगद जैसे बड़े और जीवनदायी वृक्षों का अधिक से अधिक रोपण करें। ऐसे वृक्ष पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, भूजल स्तर सुधारने और वर्षा चक्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि जल संकट से बचने के लिए समाज को मिलकर निम्न प्रमुख प्रयास करने होंगे—
पानी बचाने के लिए 10 बड़े प्रयास :
- हर घर, स्कूल और संस्थान में वर्षा जल संचयन अनिवार्य हो।
- पुराने तालाब, बावड़ी, कुएं और जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन किया जाए।
- प्रत्येक घर और संस्था अपना जल बजट तैयार करे।
- पेड़ लगाओ–पानी बचाओ अभियान को जनआंदोलन बनाया जाए।
- कृषि में ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक को बढ़ावा दिया जाए।
- पानी की बर्बादी रोकने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं।
- घरों में ग्रे-वॉटर पुनः उपयोग की व्यवस्था अपनाई जाए।
- उद्योगों में जल पुनर्चक्रण प्रणाली अनिवार्य की जाए।
- स्कूलों और समाज में जल संरक्षण शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
- सरकार, समाज, उद्योग, किसान, छात्र और नागरिक मिलकर सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करें।
अंत में डॉ. द्विवेदी ने संदेश दिया —
“आज लगाया गया एक वृक्ष, आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी और जीवन की सुरक्षा है। आज पानी बचाएंगे, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।”



