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एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी और जर्मनी के बीएसबीआई के बीच समझौता; भारतीय छात्रों को मिलेंगे वैश्विक अवसर
पुणे, 4 अगस्त, 2026 – एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU), पुणे ने वैश्विक उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए बर्लिन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इनोवेशन (BSBI), जर्मनी के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते पर एमआईटी-डब्ल्यूपीयू, पुणे के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय डॉ. राहुल वी. कराड और बीएसबीआई स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इनोवेशन (बीएसबीआई, बर्लिन) के प्रोवोस्ट और ग्लोबल यूनिवर्सिटी सिस्टम्स, जर्मनी (GGG) के मुख्य शैक्षणिक अधिकारी प्रो. डॉ. काइरियाकोस कौवेलियोटिस ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर बीएसबीआई बर्लिन के इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन फैकल्टी के डीन प्रो. शिव त्रिपाठी और एमआईटी-डब्ल्यूपीयू पुणे के रजिस्ट्रार श्री गणेश पोकले भी उपस्थित थे। यह सहयोग शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा देगा, साथ ही वैश्विक दक्षताओं वाले स्नातकों को तैयार करने के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण और नवाचार के अवसर पैदा करेगा।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू पुणे के रजिस्ट्रार श्री गणेश पोकले ने इस गठबंधन को लेकर अत्यधिक आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि एमआईटी-डब्ल्यूपीयू और बर्लिन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इनोवेशन इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से एक ऐसा सेतु बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं जिससे पूरे शैक्षणिक समुदाय को लाभ होगा। इसी भावना को दोहराते हुए प्रो. डॉ. काइरियाकोस कौवेलियोटिस ने कहा कि यह साझेदारी भारत-यूरोपीय शैक्षिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों संस्थान तुरंत सक्रिय छात्र और संकाय आदान-प्रदान शुरू करेंगे, साझा अनुसंधान संबंधों को मजबूत करेंगे और सीखने के अनुभव को समृद्ध करने के लिए पारस्परिक द्विपक्षीय दौरों का समन्वय करेंगे।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के संकाय को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. कौवेलियोटिस ने वैश्विक शिक्षा के भविष्य के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण रेखांकित किया, जिसमें जिम्मेदारी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने समझाया कि फॉर्मेटिंग और सिलेबस अपडेट जैसे भारी प्रशासनिक कार्यों को स्वचालित करके शिक्षक छात्रों की गहरी सलाह (मेंटरिंग) और प्रामाणिक संवाद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मूल्यवान समय निकाल सकते हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस तरह से एआई को अपनाने वाले संस्थान संसाधनों में कटौती करने या संकाय पदों को कम करने के उद्देश्य से सस्ते मॉडल बनाने के बजाय अधिक समृद्ध, उच्च मूल्य वाले शैक्षिक अनुभव पैदा करेंगे।
प्रो. डॉ. कौवेलियोटिस ने छात्र गतिशीलता के वैश्विक रुझान पर भी बात की और उल्लेख किया कि पांच जर्मन संस्थानों में उनके लगभग 70% छात्र भारत से हैं। अंतर्राष्ट्रीय अनुभव के मूल्य को स्वीकार करते हुए उन्होंने भारतीय संस्थानों से आग्रह किया कि वे अपनी प्रतिभाशाली प्रतिभाओं के कौशल को स्थायी रूप से विदेशों में निर्यात होने वाले ‘ब्रेन ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) को रोकने के लिए विश्व स्तरीय तत्वों को देश में ही लाएं। उन्होंने इस निरंतर कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के अद्वितीय ‘लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर’ की सराहना की।
अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रो. डॉ. कौवेलियोटिस ने विश्व शांति, सद्भाव और संघर्ष समाधान पर केंद्रित एक दुर्लभ और शक्तिशाली दार्शनिक पहचान के साथ संतुलित एक मजबूत शैक्षणिक आधार रखने के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की प्रशंसा की। उन्होंने उल्लेख किया कि जहां पश्चिमी विश्वविद्यालय अक्सर लाभ के लक्ष्यों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं एमआईटी-डब्ल्यूपीयू का विशिष्ट नैतिक मॉडल इसे एक वैश्विक नवाचार केंद्र बनने की स्थिति में रखता है। उन्होंने कल्पना की कि विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवा नवाचार, जलवायु प्रौद्योगिकियों, स्मार्ट विनिर्माण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय समाधानों का नेतृत्व करेगा और वास्तव में जिम्मेदार वैश्विक नागरिक तैयार करेगा।


