- Toxics Link Welcomes CDSCO’s Nationwide Action Against Toxic Skin-Lightening Products
- bajaj Electricals comes on board as co-Powered by sponsor for Bigg Boss Hindi Season 20
- Rupali Suri, Manushi Chhillar and Malaika Arora Rule the Fashion Game: 3 Style Icons Who Continue to Turn Heads
- From Hathoda Tyagi to Jana: 7 Roles That Show Abhishek Banerjee’s Range
- Rohit Saraf on Undergoing 15-Months of Physical Transformation for The Revolutionaries: I was active, I was fit, but I was definitely not Brad Pitt from Fight Club
विश्व मलेरिया दिवस: एक मच्छर के एक काटने से बिगड़ सकती है सेहत, समय रहते पहचान और बचाव है जरूरी
इंदौर, 25 अप्रैल 2026। हर वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को मलेरिया जैसी गंभीर संक्रामक बीमारी के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उन प्रयासों को मजबूती देने के लिए मनाया जाता है, जिनका लक्ष्य मलेरिया की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और जनसहभागिता को बढ़ाना है। आज भी दुनिया के अनेक देशों में मलेरिया लाखों लोगों को प्रभावित करता है और भारत में भी यह बीमारी मौसम बदलने के साथ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी और वर्षा का मौसम मलेरिया फैलने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इस दौरान घरों, कॉलोनियों, निर्माण स्थलों, खुले मैदानों और जलभराव वाले क्षेत्रों में मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। यदि समय पर सफाई, फॉगिंग और पानी निकासी जैसे कदम न उठाए जाएं तो संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
मलेरिया एक परजीवी जनित रोग है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है और फिर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी शरीर में प्रवेश कर रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करने लगता है। धीरे धीरे यह संक्रमण शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है। गंभीर स्थिति में यह मस्तिष्क, फेफड़ों, किडनी और लीवर को भी प्रभावित कर सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार मलेरिया के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई लोग इसे वायरल समझकर अनदेखा कर देते हैं। यही लापरवाही बाद में गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी आना, पसीना आना, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी, उल्टी, भूख न लगना, चक्कर आना और अत्यधिक थकान शामिल हैं। कई मरीजों में बुखार एक निश्चित अंतराल पर बार बार आता है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों में मलेरिया का असर अधिक खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोगों में संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है और अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए संवेदनशील वर्ग को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स इंदौर के डॉ. निखिलेश जैन ने कहा कि मलेरिया को कभी भी सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को दो दिन से अधिक बुखार है, बार बार ठंड लग रही है, कमजोरी बढ़ रही है या शरीर में असामान्य थकान महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही दवा मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है, लेकिन देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने बताया कि कई बार मरीज घरेलू उपचार या बिना जांच के दवा लेते रहते हैं, जिससे बीमारी दब जाती है लेकिन खत्म नहीं होती। बाद में अचानक हालत बिगड़ सकती है। इसलिए स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ही उपचार करना चाहिए।
मलेरिया की पुष्टि रक्त जांच से की जाती है। अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों में उपलब्ध ब्लड टेस्ट के माध्यम से संक्रमण की पहचान की जा सकती है। जितनी जल्दी जांच होगी, उतनी जल्दी इलाज शुरू हो सकेगा। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में मलेरिया का प्रभावी उपचार उपलब्ध है, लेकिन दवाओं का पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी है। बीच में दवा छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है।
मलेरिया से बचाव का सबसे बड़ा तरीका मच्छरों की संख्या कम करना और उनके काटने से बचना है। इसके लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित बदलें, गमलों की ट्रे साफ रखें, टंकी ढककर रखें, टूटे बर्तनों, पुराने टायरों और कबाड़ में पानी न भरने दें। घर के आसपास साफ सफाई रखें और नालियों को जाम न होने दें।
रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं। पूरी बाजू के कपड़े पहनें। बच्चों को शाम के समय बाहर खेलने भेजते समय सुरक्षा का ध्यान रखें। मच्छर भगाने वाली क्रीम, वेपराइजर या स्प्रे का उपयोग भी लाभकारी हो सकता है।
सामुदायिक स्तर पर भी जागरूकता जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में अधिक मच्छर हों या कई लोग बुखार से पीड़ित हों तो स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत सूचना देनी चाहिए। कॉलोनियों, स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाना समय की जरूरत है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया केवल व्यक्तिगत बीमारी नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। यदि एक परिवार सावधान है लेकिन आसपास गंदगी और जलभराव है, तो खतरा बना रहेगा। इसलिए हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
विश्व मलेरिया दिवस हमें यह संदेश देता है कि जागरूकता, स्वच्छता, समय पर जांच और सही इलाज से मलेरिया को नियंत्रित किया जा सकता है। नागरिकों से अपील है कि बुखार को हल्के में न लें, स्वयं दवा न लें और जरूरत पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। छोटी सावधानी बड़े संकट से बचा सकती है।


