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खतरा संसार में नहीं, हमारी कामनाओं में: स्वामी परमानंद
इंदौर. जीवन की सारी समस्याएं बाहर नहीं, हमारे अंदर ही हैं, जिससे हमें सुख मिलता है, वही कई बार हमारे दुख का कारण भी बन जाता है. राग-द्वेष, सुख-दुख ये ऐसे कारण हैं, जो हमें अपने लक्ष्य से कहीं और ले जाते हैं. खतरा संसार से नहीं, हमारी कामनाओं से है। कामनाएं ही हमारी सारी समस्याओं की जड़ है.
युग पुरूष स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने आज सुबह-शाम पंजाब अरोड़वंशीय धर्मशाला भवन पर अखंड परमधाम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे ध्यान योग शिविर में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए. सत्संग के दौरान साध्वी चैतन्य सिंधु, हरिद्वार के स्वामी ज्योतिर्मयानंद, स्वामी योग विद्यानंद सहित अनेक संत विद्वानों ने भी अपने विचार रखे. सुबह के सत्र में सैकड़ों साधकों ने महामंडलेश्वरजी के निर्देशन मेंयोग के आसन भी सीखे. संचालन साध्वी चैतन्य सिंधु ने किया.
लक्ष्य ब्रह्म को जानने पर हो फोकस
स्वामी परमानंदजी ने कहा कि कामनाएं मनुष्य को कहां से कहां ले जाती है. मन का भटकाव भी इन कामनाओं को प्रश्रय देता है. ब्रम्हरूपी सत्य को नहीं जानना भी हमारे अज्ञान का बहुत बड़ा कारण है. पशु भी हमारी तरह सभी काम करते हैं लेकिन कुछ गुण ऐसे हैं, जो परमात्मा ने केवल मनुष्य को दिए हैं. यह जगत पशुओं को भी दिखता है लेकिन वे ब्रम्ह और सत्य को नहीं समझ सकते. हमारा लक्ष्य केवल ब्रम्ह को जानने तक ही फोकस होना चाहिए, अन्य किसी विषय पर चले गए तो लक्ष्य दूर छिटक जाएगा.
अध्यक्ष सीए विजय गोयनका के अनुसार 12 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 7 से 8 बजे तक निशुल्क योगासन तथा सुबह 8 से 9 और सांय 6 से 9 बजे तक युग पुरूषजी के ध्यान एवं प्रवचनों की अमृतवर्षा होगी.


