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केंद्रीय जेल इंदौर में योग दिवस पर 2300 बंदियों ने किया सामूहिक योगाभ्यास
आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन और ‘सेहत एवं सूरत’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ विशेष योग सत्र
इंदौर, 21 जून। 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल इंदौर के प्रांगण में एक ऐतिहासिक आयोजन के तहत लगभग 2300 बंदियों, जिनमें महिला कैदी भी शामिल थीं, ने सामूहिक रूप से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। यह आयोजन आयुष मेडिकल वेलफ़ेयर फ़ाउंडेशन, इंदौर और ‘सेहत एवं सूरत’ मासिक स्वास्थ्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
इस विशेष योग सत्र का उद्देश्य जेल में रह रहे बंदियों के शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था, ताकि वे तनावमुक्त जीवन की ओर अग्रसर होकर समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद श्री शंकर लालवानी ने योग को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा, “योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन का सशक्त माध्यम भी है, जो व्यक्ति को संपूर्ण रूप से स्वस्थ बनाता है।”
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे डॉ. ए.के. द्विवेदी, सदस्य, वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड, CCRH, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार। उन्होंने कहा, “जेल जैसे वातावरण में योग और प्राणायाम एक नई चेतना भरने का कार्य कर सकते हैं। यह आत्म-सुधार की दिशा में एक प्रभावशाली पहल है।” डॉ. द्विवेदी के निर्देशन में पिछले 11 वर्षों से जेल में नियमित योग कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जिससे कैदियों के व्यवहार और सोच में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती अलका सोनकर, अधीक्षक, केंद्रीय जेल, इंदौर ने की। उन्होंने जेल प्रशासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा, “आज योग के माध्यम से बंदी न केवल अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं।”
योग गुरु दीपक उपाध्याय ने बंदियों को सरल एवं उपयोगी योगासन सिखाए, जबकि प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र पुरी ने मानसिक तनाव को दूर करने की श्वास तकनीकों का अभ्यास कराया।
इस आयोजन के संचालन एवं समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका श्री विनय पांडेय और श्री जोशी ने निभाई। जेल अधीक्षक सहित जेलर, उप जेलर और अन्य अधिकारीगण भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए और योगाभ्यास कर इस पहल को प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान एवं ‘ॐ’ ध्वनि के सामूहिक उच्चारण के साथ हुआ, जिसने समूचे वातावरण को ऊर्जा और शांति से भर दिया।


