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ग्रामीण स्वास्थ्य, जीवनशैली जनित रोगों की रोकथाम और सुलभ होम्योपैथी चिकित्सा पर दिया विशेष जोर
ग्राम सिमलिया चायु में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, प्रो. डॉ. ए.के. द्विवेदी ने दिया स्वस्थ जीवन का संदेश
विश्व स्वास्थ्य दिवस के पूर्व ग्राम सिमलिया चायु में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
इंदौर/सिमलिया चायु, । विश्व स्वास्थ्य दिवस के पूर्व आज रविवार को ग्राम सिमलिया चायु में एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक प्रोफेसर डॉ एके द्विवेदी, संचालक एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर इंदौर, प्रोफेसर गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज तथा कार्य परिषद सदस्य देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोगों के प्रति सचेत रहने और समग्र चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने का संदेश दिया। डॉ. द्विवेदी समाज सेवा के लिए भी व्यापक रूप से जाने जाते हैं।
कार्यक्रम में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स, लंबर एवं सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस, वेरिकोज वेन्स, उच्च रक्तचाप, हृदयाघात तथा घुटनों के दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके क्लिनिक में आने वाले अधिकांश मरीज 45 से 55 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं, लेकिन उनके घुटनों की स्थिति 65-70 वर्ष के बुजुर्गों जैसी पाई जा रही है, जिसका प्रमुख कारण शारीरिक श्रम की कमी और लंबे समय तक एक ही स्थिति में काम करना है।
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि एनीमिया, आर्थराइटिस और ऑटोइम्यून रोगों जैसे क्रॉनिक रोगों में होम्योपैथी की प्रभावशीलता निरंतर बढ़ रही है। विशेष रूप से एनीमिया के उपचार में उनकी पहचान प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश तक स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कैंसर उपचार के बाद उत्पन्न जटिल स्थितियों जैसे हीमोग्लोबिन की कमी, प्लेटलेट्स की गिरावट एवं पैन साइटोपीनिया में भी होम्योपैथिक चिकित्सा सहायक सिद्ध हो रही है।
पैलियेटिव केयर में सहायक भूमिका
उन्होंने बताया कि कैंसर के अंतिम चरण के मरीजों में, जहां कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी के विकल्प सीमित हो जाते हैं, वहां होम्योपैथी एक सहायक (पैलियेटिव) चिकित्सा के रूप में दर्द और कष्ट को कम कर जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर रही है।
आपने कहा कि कम लागत और अधिक सुरक्षित उपचार पद्धति है होम्योपैथी
ग्रामीण स्वास्थ्य पर विशेष जोर
डॉ. द्विवेदी ने ग्रामीण स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांवों में समय पर जांच, पोषण की कमी की पहचान, स्वच्छता और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में साधारण बीमारियां भी जागरूकता के अभाव में गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य शिविर, घर-घर जागरूकता और सरल एवं सुलभ चिकित्सा व्यवस्था से ग्रामीणों के स्वास्थ्य स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की। अंत में सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का संदेश दिया गया।


