- Kumar Sanu surprises contestant Durgesh; says, “I will send a TV to your home so that your mother and father can watch you on Sa Re Ga Ma Pa”
- ‘सा रे गा मा पा’ के कंटेस्टेंट दुर्गेश यादव के लिए कुमार सानू का खास तोहफा, बोले, “आज ही आपके घर टीवी भिजवाऊंगा, ताकि आपके माता पिता आपको शो में देख सकें”
- यूनिक हॉस्पिटल में दिव्यांग बच्चों के लिए 30 बेड के निःशुल्क विशिष्ट सेवा वार्ड का लोकार्पण
- Kunal Kapoor Offers a Glimpse into His World as Lord Indra in Ramayana, Calls It a Magnum Opus: “So Much Goes into Creating Something of This Scale”
- राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से बढ़ सकती हैं स्वस्थ जीवन की संभावनाएं
“मेरे पहले के बेबाक किरदारों से अलग, मेरा किरदार सृष्टि अपनी भावनाएँ और खामोशी से ज़्यादा व्यक्त करता है,” गुलकी जोशी
यादें, सोनी सब
मुंबई, अप्रैल 2026: सोनी सब का हाल ही में लॉन्च हुआ शो यादें ज़िंदगी, याददाश्त खोने और दूसरे मौकों की जटिलताओं को एक भावनात्मक और गहराई से भरी कहानी के ज़रिए पेश कर रहा है। इस सफर को और गहराई देती हैं अभिनेत्री गुलकी जोशी, जो शो में सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं।
सृष्टि अग्रवाल एक शांत, लेकिन बेहद भावुक हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर है, जो प्यार, हिम्मत और अनकही भावनाओं के बीच अपनी ज़िंदगी को सँभालती है। उनके साथ नज़र आते हैं इक़बाल खान, जो कि डॉक्टर देव का किरदार जो निभा रहे हैं। वे और कोई नहीं, बल्कि सृष्टि के पूर्व पति हैं। शो रिश्तों की बारीकियों और दिल छू लेने वाली कहानी को इंसानी जुड़ाव के साथ पेश करता है।
गुलकी ने सृष्टि के किरदार में खुद को भीतर तक उतारन, कहानी की भावनात्मक गहराई और आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को क्या देखने को मिलेगा, इस पर खुलकर बात की।
यादें दूसरी मौकों की कहानी है। यह थीम आपको व्यक्तिगत तौर पर कैसे जोड़ती है?
दूसरे मौके और अधूरी भावनाएँ ऐसी चीज़ें हैं, जिनसे हम सब अलग-अलग समय पर अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी तरह जुड़ते हैं। मुझे ‘यादें’ की सबसे खूबसूरत बात यही लगती है कि यह बहुत खूबसूरती से दर्शाता है कि भावनाएँ समय के साथ गायब नहीं होतीं। वे हमारे साथ ही रहती हैं और हमें वही इंसान बनाती हैं, जो हम आगे चलकर बनते हैं। यह बहुत ही सच्चा और खुद से जुड़ा हुआ नज़रिया है और यही मुझे व्यक्तिगत तौर पर जोड़ता है।
हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर के रोल से परे, सृष्टि अग्रवाल दिल से कैसी इंसान है?
अपने दिल से सृष्टि बेहद भावुक, वफादार और अद्भुत रूप से मज़बूत है। बाहर से वह शांत और प्रैक्टिकल नज़र आती है, लेकिन अंदर ही अंदर वह अनकही भावनाओं और गहरी संवेदनाओं की दुनिया समेटे हुए है। वह ऐसी इंसान है, जो गहराई से प्यार करती है और जिनसे जुड़ी होती है, उनके साथ मज़बूती से खड़ी रहती है। चुनौतियों के बावजूद वह आसानी से हार नहीं मानती। उसकी नर्मी और मज़बूती का यह संतुलन उसे बेहद प्यारा और रिलेटेबल किरदार बनाता है।
आपका किरदार डॉक्टर देव के साथ एक लेयर्ड रिलेशनशिप शेयर करता है। इक़बाल के साथ इस डायनामिक को बनाने का अनुभव कैसा रहा?
यह सफर बहुत नैचुरल रहा। इक़बाल बेहद इंट्यूटिव एक्टर हैं, जिससे सीन नैचुरली फ्लो करते हैं और कभी फोर्स्ड नहीं लगते। चूँकि, सृष्टि और डॉक्टर देव का रिश्ता इतिहास, भावनाओं और जटिलताओं से भरा है, हमने जानबूझकर उनके बीच की खामोशियों और अनकहे पलों पर ध्यान दिया। अक्सर वही अनकही भावनाएँ डायलॉग्स से ज्यादा असर करती हैं। उनके साथ काम करने से सीन में गहराई, बारीकी और ऑथेंटिसिटी लाना बहुत आसान हो गया।
क्या आपने सृष्टि की भावनात्मक यात्रा को गढ़ने के लिए किसी असली अनुभव या ऑब्ज़र्वेशन से प्रेरणा ली?
हाँ, मैंने असली ज़िंदगी के ऑब्ज़र्वेशन से प्रेरणा ली, खासकर उन रिश्तों से जहाँ टाइमिंग या हालात ने सब कुछ बदल दिया। वो अनुभव और वो भावनाएँ, जो हालात बदलने के बाद भी दिल में बनी रहती हैं, सृष्टि की यात्रा को गढ़ने में मददगार रहीं। उन भावनाओं को महसूस करना उसके इमोशनल ग्राफ को और असली, सच्चा और दर्शकों के लिए रिलेटेबल बना देता है।
सृष्टि आपके पहले निभाए किरदारों से कैसे अलग है?
सृष्टि मज़बूत है, लेकिन उसकी मज़बूती ज्यादा अंदरूनी और सूक्ष्म है। मेरे पहले के कुछ बेबाक किरदारों से अलग, सृष्टि अपनी भावनाएँ खामोशी, इमोशन्स और अनकहे पलों से व्यक्त करती है। यह बदलाव मेरे लिए एक्टर के तौर पर बहुत दिलचस्प था, क्योंकि इसमें बहुत संयम और भावनात्मक गहराई की ज़रूरत थी। इसने मुझे परफॉर्मेंस का एक शांत और बारीक रूप एक्सप्लोर करने का मौका दिया, जो चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ क्रिएटिवली भी संतोषजनक रहा।
इक़बाल खान, सृष्टि सिंह और बाकी कास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
यह अनुभव सचमुच शानदार रहा। सेट पर बहुत पॉज़िटिव और कोलैबरेटिव एनर्जी रहती है, जो लंबे समय तक काम करने में बड़ा फर्क डालती है। इक़बाल सीन में अनुभव और शांति लाते हैं, जबकि सृष्टि ताज़गी और उत्साह जोड़ती है। पूरी कास्ट और क्रू बेहद सपोर्टिव है और टीमवर्क की भावना बहुत मज़बूत है। ऐसे माहौल में काम करने से परफॉर्मेंस नैचुरली बेहतर होती है और हर किसी का सर्वश्रेष्ठ सामने आता है।
बिना ज़्यादा खुलासा किए, दर्शक आने वाले एपिसोड्स से क्या उम्मीद कर सकते हैं?
दर्शक कई भावनात्मक ट्विस्ट देखेंगे, क्योंकि कहानी की गहराई धीरे-धीरे सामने आएगी। रिश्ते अप्रत्याशित तरीके से परखे जाएँगे और कुछ सच्चाइयाँ सामने आकर किरदारों की ज़िंदगी बदल सकती हैं। यह एक इमोशनल रोलरकोस्टर होगा, लेकिन बहुत असली और रिलेटेबल। मुझे यकीन है कि दर्शक इस सफर में पूरी तरह जुड़ेंगे और जानने के लिए उत्सुक रहेंगे कि आगे क्या होता है।
देखिए यादें हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ सोनी सब पर


