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पर्यावरण संरक्षण की सीख देकर बिदा हुआ मराठी सोशल ग्रुप का जत्रा
22 हज़ार किलो आॅर्गेनिक वेस्ट और सवा लाख से ज्यादा प्लास्टिक प्लेट्स को कचरा बनने से बचाया

इंदौर। पिछले 18 बरसों से शहरवासियों को महाराष्ट्रीय स्वाद और संस्कृति की झलक दिखलाने वाले जत्रा का रविवार को समापन हुआ। मराठी सोशल ग्रुप के इस आयोजन को मिलने वाला लोगों का स्नेह भी अपार है। अंतिम दिन उमड़ी भीड़ इसका प्रत्यक्ष साक्ष्य है। शाम के बाद तो एक मौका ऐसा भी आया जब पूरे जत्रा परिसर में पैर रखने की भी जगह बमुश्किल मिल रही थी।
मराठी सोशल ग्रुप के सुधीर दांडेकर और राजेश शाह ने बताया- हर साल जत्रा को लोगों का भरपूर प्यार मिलता है लेकिन जत्रा 2018 में मिला स्नेह अभूतपूर्व रहा। स्वाद और संस्कृति की इस परंपरा का समापन भी खास अंदाज़ में हुआ। जत्रा का आयोजन अगले साल 18 से 20 अक्टूबर तक किया जाएगा। जत्रा 2018 की सबसे खास बात रही इसके माध्यम से हुआ पर्यावरण संरक्षण।
थ्रीआर थीम पर हुए जत्रा में 22 हज़ार किलो आॅर्गेनिक वेस्ट बचाते हुए उससे खाद तैयार की। इसके अलावा सात हज़ार वर्गपफीट फ्लेक्स, 1736 वर्गफीट एल्युमिनियम फाॅइल, दौ सौ वर्गफीट प्लास्टिक रैप सहित प्लास्टिक के आठ हज़ार स्ट्राॅ, 12 हज़ार डिस्पोज़ेबल ग्लास, सवा लाख डिस्पोज़ेबल प्लेट्स, 5 हज़ार बाउल्स, 22 हज़ार पाॅलिथीन बैग, दो लाख चम्मच और दस हज़ार बाॅटल्स को कचरे के रूप में फेलने से भी बचाया।
ट्रेड जोन के बारे में जयंत लोखंडे ने बताया- आयोजकों के साथ ही ये जत्रा, ट्रेड, फूड और हैंडीक्राफ्ट ज़ोन के स्टाॅल धारकों के लिए भी बेहतरीन प्रतिसाद भरा रहा। तीन दिनों के इस आयोजन में करोड़ों के उत्पादों की बिक्री हुई। तीन दिनों में लाखों लोगों ने जत्रा में शिरकर की। अगले वर्ष जत्रा के उत्साह का इसी बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि ट्रेड जोन के लिए कई कंपनियों इसी वर्ष स्टाॅल बुक कर दिए हैं।


