धनतेरस का संदेश: भौतिक धन से बड़ा धन है मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य – डॉ. ए.के. द्विवेदी

धन से पहले स्वास्थ्य, संपत्ति से पहले आरोग्य और समृद्धि के साथ मानसिक शांति भी जरूरी

इंदौर। धनतेरस को सामान्यतः सोना-चाँदी, बर्तन और वाहन खरीदने के पर्व के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका वास्तविक संदेश इससे कहीं अधिक व्यापक है। भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हमें याद दिलाता है कि मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति उसका स्वास्थ्य है। स्वस्थ शरीर के साथ मानसिक स्वस्थता और मन की शांति भी सुखी एवं सार्थक जीवन के लिए अनिवार्य है।

प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक एवं शिक्षाविद् डॉ. ए.के. द्विवेदी ने धनतेरस के अवसर पर कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य की परिभाषा केवल बीमारी से मुक्त रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वस्थता को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आज विशेषकर बच्चों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनता जा रहा है। मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, नींद की कमी, पढ़ाई एवं करियर का दबाव, अकेलापन तथा परिवार में संवाद की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल अनुशासन का पाठ पढ़ाने के बजाय उसकी भावनाओं, विचारों और समस्याओं को समझना जरूरी है। Gen Z को Great Z बनाने के लिए उन्हें सुनना, समझना और सही दिशा देना होगा। माता-पिता और शिक्षकों को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी संकोच के अपनी बात कह सकें।

बच्चों की मुस्कान ही वास्तविक धन

डॉ. द्विवेदी ने अपने चिकित्सकीय अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि ऐसे दो बच्चे जो ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से जूझ रहे थे, एक साल की होम्योपैथिक चिकित्सा एवं आवश्यक देखभाल से बच्चों में काफी सकारात्मक बदलाव और राहत देखने को मिली। बच्चों में आए बदलाव और उनके माता पिता के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी देखकर उन्हें गहरी आत्मसंतुष्टि का अनुभव हुआ।

उन्होंने कहा कि उस क्षण महसूस हुआ कि वास्तविक धन सोना-चाँदी या भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटाना, परिवार में उम्मीद जगाना और किसी के जीवन में खुशियाँ लाना है।

यही धनतेरस का वास्तविक संदेश है—स्वास्थ्य, संवेदना और मानव सेवा से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं।

मानसिक शांति भी है जीवन की वास्तविक समृद्धि

डॉ. द्विवेदी के अनुसार योग, ध्यान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, सकारात्मक पारिवारिक संवाद और आध्यात्मिक अभ्यास मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। ॐ एवं महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी अनेक लोगों के लिए मानसिक शांति और एकाग्रता का माध्यम बन सकता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में आवश्यकता पड़ने पर योग्य विशेषज्ञ से परामर्श और उचित उपचार लेना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भगवान धन्वंतरि के हाथों में सुशोभित अमृत कलश केवल दीर्घायु का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वस्थ और सार्थक जीवन का संदेश भी देता है।

धनतेरस की वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि दीपावली की शुरुआत धन से नहीं, बल्कि भगवान धन्वंतरि अर्थात् आरोग्य की उपासना से होती है। इसका संदेश स्पष्ट है—

धन से पहले स्वास्थ्य, संपत्ति से पहले आरोग्य, समृद्धि के साथ सद्बुद्धि और लंबी आयु के साथ स्वस्थ जीवन।

उन्होंने कहा कि इस धनतेरस पर हमें केवल भौतिक संपन्नता की कामना नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वयं के साथ अपने परिवार और समाज के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देने का संकल्प लेना चाहिए।

वास्तव में स्वस्थ शरीर, शांत मन, सकारात्मक विचार और किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की क्षमता ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।

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