- मध्य प्रदेश में चार साल में 1,054 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी, इंदौर में 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान के जरिए लोगों को सिखाए जा रहे डिजिटल सुरक्षा के गुर
- PPFAS Mutual Fund Opens New Office in Indore
- पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड ने इंदौर में नया ऑफिस खोला
- Arjun Kapoor Birthday Special - From Vienna to London, A Look at His Most Memorable Travel Diaries
- Saree' teaser has all the makings of the next chartbuster; fans await Riteish Deshmukh's full visual on June 27
इंदौर में विश्व होम्योपैथी दिवस पर जागरूकता, अनुसंधान और समन्वित चिकित्सा का सशक्त संदेश
इंदौर। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर ए.बी. रोड स्थित एक निजी होटल में होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI), इंदौर शाखा, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर होम्योपैथी के प्रति बढ़ते विश्वास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान आधारित चिकित्सा तथा समन्वित (इंटीग्रेटेड) हेल्थकेयर सिस्टम पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, युवा डॉक्टर, छात्र-छात्राएं एवं समाजसेवी उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा का संगम बन गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वैभव चतुर्वेदी (मुख्य मनोरोग विशेषज्ञ, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल) ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने होम्योपैथिक औषधि आर्सेनिक एल्बम का सेवन किया और संक्रमित नहीं हुए। इस अनुभव ने उनके मन में होम्योपैथी के प्रति गहरा विश्वास उत्पन्न किया। “होम्योपैथी और एलोपैथी को साथ लेकर चलने से रोगों का बेहतर और शीघ्र उपचार संभव है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सा क्षेत्र में केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि रिसर्च, अवेयरनेस और वैज्ञानिक डेटा का अत्यधिक महत्व है।
इंटीग्रेटेड चिकित्सा की आवश्यकता पर जोर
अति विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. पी. सिंह (प्राचार्य, एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, इंदौर) ने अपने उद्बोधन में Auxiliary एवं Integrated Treatment System की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “आज कैंसर जैसी जटिल बीमारियों में होम्योपैथी को सहायक एवं समन्वित चिकित्सा के रूप में अपनाया जा रहा है।”

उन्होंने एडवांस्ड और मॉडर्न होम्योपैथी की सराहना करते हुए डॉ. ए. के. द्विवेदी के कार्यों की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से इंदौर न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होम्योपैथी अनुसंधान और उपचार का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। अप्लास्टिक एनीमिया जैसे जटिल रोगों के मरीज देशभर से इंदौर आकर उपचार प्राप्त कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र की उपलब्धियों का प्रमाण है।
होम्योपैथी: समग्र स्वास्थ्य का माध्यम
विशिष्ट अतिथि डॉ. वैशाली वैकर (कार्य परिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय) ने कहा कि उन्होंने बचपन से Ferrum Phos और Calcarea Phos जैसी होम्योपैथिक औषधियों का लाभ लिया है। “होम्योपैथी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी व्यक्ति को सशक्त बनाती है।” उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि वे रील लाइफ से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन में ज्ञान अर्जित करें और पुस्तकों को अपना मित्र बनाएं।
स्पाइन सर्जरी पर महत्वपूर्ण सलाह
कार्यक्रम में डॉ. अर्पित चोपड़ा जैन ने अपने क्लिनिकल अनुभव साझा करते हुए स्पाइन (रीढ़) से संबंधित रोगों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जहाँ तक संभव हो, स्पाइन का ऑपरेशन कराने से बचना चाहिए। कई मामलों में होम्योपैथिक उपचार एवं उचित जीवनशैली से बिना सर्जरी के भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।” उन्होंने ब्रेन ट्यूमर एवं हाई क्रिएटिनिन के सफल उपचार के केस पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किए, जिससे उपस्थित चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
डॉ. ए. के. द्विवेदी का दृष्टिकोण: होम्योपैथी का बढ़ता प्रभाव

कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. ए. के. द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद भारत में होम्योपैथी चिकित्सा को नई गति और दिशा मिली है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष पद्धतियों को दिए गए प्रोत्साहन, नीतिगत समर्थन और संस्थागत विकास ने इस प्रणाली को सशक्त बनाया है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि “कोविड-19 महामारी के दौरान सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद लोगों का विश्वास होम्योपैथी के प्रति अत्यधिक बढ़ा है और अब लोग इसे एक प्रभावी एवं विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति के रूप में तेजी से अपना रहे हैं।”
डॉ. द्विवेदी ने यह भी बताया कि वे वर्ष 2015 से आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और निरंतर देश सहित विश्व स्तर पर होम्योपैथी चिकित्सा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य है कि होम्योपैथी को वैज्ञानिक प्रमाणों, रिसर्च और आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर एक सशक्त वैश्विक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्थापित किया जाए।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंदौर आने वाले समय में होम्योपैथी रिसर्च एवं एडवांस्ड ट्रीटमेंट का वैश्विक केंद्र बनकर उभरेगा।
इंदौर: उभरता हुआ वैश्विक होम्योपैथी केंद्र
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (HMAI), इंदौर के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ने कहा कि “इंदौर अब एडवांस्ड और मॉडर्न होम्योपैथी का अग्रणी केंद्र बन चुका है, जहाँ से यह चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर तक पहुँच रही है।” उन्होंने बताया कि कैंसर, किडनी एवं अन्य गंभीर बीमारियों से निराश मरीज इंदौर आकर राहत प्राप्त कर रहे हैं।

सम्मान और आयोजन की गरिमा
कार्यक्रम का संचालन दीपाली पांचाल ने किया, अतिथियों का स्वागत विनय पांडेय द्वारा किया गया तथा दीपक उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जूनियर होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं स्काउट-गाइड सदस्यों को गोल्ड मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। ये मेडल विशेष रूप से एनीमिया जागरूकता अभियान एवं विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में तैयार किए गए थे।

हैनीमेन को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में सभी चिकित्सकों एवं छात्र-छात्राओं ने डॉ. सैम्युल हैनीमेन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. यह आयोजन न केवल होम्योपैथी के प्रति जनविश्वास को सुदृढ़ करने वाला रहा, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान आधारित चिकित्सा, समन्वित स्वास्थ्य प्रणाली को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत भी सिद्ध हुआ।
इंदौर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह होम्योपैथी के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से अग्रसर है।


