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इंद्रियों के आधार पर होता है सुख-दुख का अनुभव: मनीषप्रभ सागर
इन्दौर। मनुष्य इंद्रियों के अधीन रहता है। जब वातावरण प्रतिकूल होता है तो रोता है, जब वातावरण अनुकूल होता है तो हंसता है। इंद्रियों के कारण ही हंसता है रोता है। इंद्रियों के आधार पर ही हम सुख दुख का अनुभव करते हैं। इंद्रियों को वश में करने के लिए संयम जरूरी है। संयम के लिए साधना, तप आराधना, जरूरी है। इससे धर्म आगे बढ़ेगा। उक्त विचार खरतरगच्छ गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. के…
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