जातीय संतुलन की रणनीति के तहत बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं मनोहर लाल खट्टर – डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जातीय संतुलन की रणनीति के तहत बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं मनोहर लाल खट्टर – डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों यानी कुल 36 इकाइयों में भारतीय जनता पार्टी वर्तमान समय में 21 इकाइयों में सत्ता में है । इसका एक प्रत्यक्ष कारण प्रधानमंत्री मोदी को समझा जा सकता है लेकिन अप्रत्यक्ष कारणों में सबसे प्रमुख है जातीय संतुलन की रणनीति, जिसके बल पर बीजेपी लगभग आधे से अधिक भारतीय मानचित्र को भगवा करने में सफल रही है। दिल्ली हो, राजस्थान, मध्य प्रदेश या हरियाणा, यहाँ तक…

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“सरलता से सुशोभित शिव”

“सरलता से सुशोभित शिव”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) आदि अनंत अविनाशी शिव की महिमा तो सर्वथा विख्यात है। महादेव की संज्ञा से सुशोभित शिव के जीवन में कितनी सरलता है यह तो अवर्णनीय है। कुबेर को लक्ष्मी के खजांची बनाने वाले शिव साधारण वेषभूषा धारण करते है। कर्पूर की तरह गौर वर्ण शिव शरीर पर भस्म रमाते है। प्रायः यह देखा जाता है कि विवाह में दूल्हा स्वयं को अनेक आभूषणों से सुसज्जित करता है, परंतु…

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“जगन्नाथ की त्रिभुवन में महिमा”

“जगन्नाथ की त्रिभुवन में महिमा”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) जगन्नाथ भगवान रथ पर आरूढ़, भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाले नीलांचल अर्थात पुरी में निवास करने वाले नारायण श्री हरि कृष्ण स्वरुप जगत कल्याण के लिए रथ पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते है। कृष्ण नाम तो मोक्ष प्राप्ति का सहज एवं सरल मार्ग है। भक्तों के संरक्षक पालनकर्ता भाई बलभद्र और लाड़ली सुभद्रा के साथ भ्रमण पर निकले है। सनातन धर्म में चार…

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“पिता की अनुपम छाया”

“पिता की अनुपम छाया”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) माँ की ममता और पिता की कठोरता जीवन के दो महत्वपूर्ण नियामक है। प्रारम्भ में हमें पिता के वक्तव्य बड़े साधारण प्रतीत होते है, परन्तु समयोपरांत उन वक्तव्यों में छिपी गहराई की थाह ज्ञात होती है। माता की छत्रछाया और गर्भ में बालक सुरक्षित होता है, परन्तु जो अदृश्य सुरक्षा कवच उसके दिन-रात की सुरक्षित रुपरेखा निर्धारित करता है वह है पिता। माँ की चिंताएँ दृश्यरूप में प्रतिपल…

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“राम मंदिर की प्रतीक्षारत अलौकिक दिवाली”

“राम मंदिर की प्रतीक्षारत अलौकिक दिवाली”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) अयोध्या नृप मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का वन गमन सदैव के लिए सबके हृदय में राम राज्य को स्थापित कर गया। राम तो हृदय में विराजमान उच्चारण है। राम तो अनंत भावों की अभिव्यक्ति है। राम तो धर्म के मर्म के प्रदाता है। सर्वगुण के आलय प्रभु श्रीराम का हम विनय पूर्वक वंदन करते है। राम का अयोध्या आगमन और राम मंदिर में श्रीराम का आगमन पुनः उसी भावना…

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“गजेंद्र मोक्ष और गृहस्थ जीवन”

“गजेंद्र मोक्ष और गृहस्थ जीवन”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) कार्तिक मास भगवान नारायण को समर्पित है। कार्तिक मास में नारायण स्तुति एवं दीपदान का विशेष महत्व है। विष्णु सहस्त्रानम में उल्लेखित है कि जिसके स्मरण मात्र से मनुष्य संसार के जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है, यह वाक्य गजेंद्र मोक्ष कथा में सर्वतः सिद्ध होता है। श्रीमदभागवत कथा के आठवें स्कंद में गजेंद्र मोक्ष की कथा वर्णित है। जिसमें नारायण गज की हृदय विदारक स्थिति…

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अब वो बात कहाँ…..

अब वो बात कहाँ…..

अतुल मलिकराम (लेखक और राजनीतिक रणनीतिकार) एक रोज मेरा किसी काम से जाना हुआ, घर लौटते हुए शाम हो गई। मैं घर लौट ही रहा था कि दूर किसी चाय की दुकान पर एक पुराना गाना सुनाई दिया। गाने के बोल मेरे कानों में पड़े तो एक पल के लिए मैं जवानी के उस समयमें पहुँच गया जब मैं गाने सुनने का बड़ा शौकीन हुआ करता था। लेकिन कुछ ही देर में वापस आज की…

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“श्राद्ध, श्रद्धेय और श्रृद्धा सुमन”

“श्राद्ध, श्रद्धेय और श्रृद्धा सुमन”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) श्राद्ध कर्म का वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध का समापन होने जा रहा है। श्राद्ध में निहित श्रृद्धा ही हमें श्रृद्धा सुमन अर्पित करने की ओर प्रेरित करती है। श्राद्ध के द्वारा हमारे पितृ प्रसन्न होते है। आज जीवन में जो शायद प्रसन्नता के सुन्दर रंग हमें चहुँ ओर बिखरे दिखाई देते है, वह हमारे पूर्वजों की मेहनत एवं आशीष…

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“गणेशोत्सव में गजानन आह्वान”

“गणेशोत्सव में गजानन आह्वान”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) गिरिजानंदन, लम्बोदर गणपति ज्ञान का अलौकिक प्रकाश स्वरुप है। शुभारम्भ के जनक है शिवनंदन, इसलिए हम अच्छे कार्य की शुरुआत को श्रीगणेश करना कहते है। शास्त्रों एवं पुराणों में विघ्न विनायक को ओंकार स्वरुप वर्णित किया गया है। प्रथम पूज्य गणेश का स्मरण हमारे सारे मनोरथों को पूर्ण करने वाला है, क्योंकि वे हमें ज्ञान के साथ विवेक भी प्रदान करते है। वर्तमान समय में सर्वत्र गणेशोत्सव की…

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“माँ… सूक्ष्म शब्द… गहन विश्लेषण”

“माँ… सूक्ष्म शब्द… गहन विश्लेषण”

माँ कितना सूक्ष्म शब्द है, पर उसके भीतर छिपी गहराई, विशालता और प्रगाढ़ता कितनी अनंत और अथाह है। माँ के जीवन में संतान के लिए अनंत खुशियों का खजाना समाहित होता है। माँ के जीवन की धुरी तो संतान की ख़ुशी और भलाई के समीप ही चलायमान होती है। ईश्वर की सृजन की गई सृष्टि में माँ के दुलार, प्यार, स्नेह और करुणा की कोई सीमा नहीं है। माँ तो अनुरागिनी है। वात्सल्य दायिनी माँ…

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