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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न की याचिका पर सुनाया अभूतपूर्व फ़ैसला
2 महीने तक न हो गिरफ्तारी, याचिकाकर्ता मुकेश बंसल की याचिका पर हुई सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न की धारा 498 ए के दुरुपयोग को देखते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दर्ज मुकदमे में दो माह तक कोई भी गिरफ्तारी नहीं कि जाए और साथ ही दोनों पक्षों को 2 महीने का कूलिंग पीरियड दिया जाये। इस दौरान परिवार कल्याण समिति मामले पर विचार कर अपनी रिपोर्ट दे। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने मुकेश बंसल की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि लिव इन रिलेशनशिप चुपचाप हमारी सामाजिक सांस्कृतिक मान्यताओं परंपरागत विवाह का स्थान लेती जा रही है। यह जमीनी हकीकत है जिसे हमें स्वीकार करना पड़ेगा। मुकेश बंसल , दिल्ली, ने अपनी बहू शिवांगी बंसल (गोयल), निवासी, पिलखुआ, हापुड़ के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इनकी इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए ये फ़ैसला सुनाया है।
याचिकाकर्ता मुकेश बंसल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “मैं माननीय उच्च न्यायालय का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने आज एक ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाया है। इससे दहेज उत्पीड़न के बेबुनियाद और झूठे मामलों में फंसे हुए सभी पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिला है। आने वाले समय में कोर्ट के इस नज़ीर फैसले से उन सभी लोगों को झूठे मुकदमों से राहत मिलेगी। ऐसे मुकदमे मानसिक और भावनात्मक रूप से पीड़ित को कमज़ोर बना देते हैं। समाज मे उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है। इस फैसले के बाद मेरे परिवार का खोया हुआ सम्मान वापस मिला है।”
न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी, जिन्होंने कई निर्देश पारित किए, ने कहा कि “शीतलन अवधि” के दौरान, मामले को तुरंत प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति [एफडब्ल्यूसी] को भेजा जाएगा।
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल उन मामलों को एफडब्ल्यूसी को प्रेषित किया जाएगा जिनमें धारा 498-ए आईपीसी के साथ कोई चोट नहीं है, धारा 307 और आईपीसी की अन्य धाराएं जिनमें 10 साल से कम कारावास है, को लागू किया गया है।
एफडब्ल्यूसी की भूमिका पर, न्यायाधीश ने कहा, धारा 498 ए आईपीसी और अन्य संबद्ध धाराओं के तहत प्रत्येक शिकायत या आवेदन को संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा तुरंत परिवार कल्याण समिति को भेजा जाएगा।
उक्त शिकायत या प्राथमिकी प्राप्त होने के बाद, समिति दोनों पक्षों को उनके चार बुजुर्गों के साथ व्यक्तिगत बातचीत करने के लिए बुलाएगी और केस दर्ज होने से दो महीने की अवधि के भीतर उनके बीच के मुद्दे/शंकाओं को दूर करने का प्रयास करेगी।


