“श्राद्ध, श्रद्धेय और श्रृद्धा सुमन”

“श्राद्ध, श्रद्धेय और श्रृद्धा सुमन”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) श्राद्ध कर्म का वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में वर्णित है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध का समापन होने जा रहा है। श्राद्ध में निहित श्रृद्धा ही हमें श्रृद्धा सुमन अर्पित करने की ओर प्रेरित करती है। श्राद्ध के द्वारा हमारे पितृ प्रसन्न होते है। आज जीवन में जो शायद प्रसन्नता के सुन्दर रंग हमें चहुँ ओर बिखरे दिखाई देते है, वह हमारे पूर्वजों की मेहनत एवं आशीष…

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“गणेशोत्सव में गजानन आह्वान”

“गणेशोत्सव में गजानन आह्वान”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) गिरिजानंदन, लम्बोदर गणपति ज्ञान का अलौकिक प्रकाश स्वरुप है। शुभारम्भ के जनक है शिवनंदन, इसलिए हम अच्छे कार्य की शुरुआत को श्रीगणेश करना कहते है। शास्त्रों एवं पुराणों में विघ्न विनायक को ओंकार स्वरुप वर्णित किया गया है। प्रथम पूज्य गणेश का स्मरण हमारे सारे मनोरथों को पूर्ण करने वाला है, क्योंकि वे हमें ज्ञान के साथ विवेक भी प्रदान करते है। वर्तमान समय में सर्वत्र गणेशोत्सव की…

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“माँ… सूक्ष्म शब्द… गहन विश्लेषण”

“माँ… सूक्ष्म शब्द… गहन विश्लेषण”

माँ कितना सूक्ष्म शब्द है, पर उसके भीतर छिपी गहराई, विशालता और प्रगाढ़ता कितनी अनंत और अथाह है। माँ के जीवन में संतान के लिए अनंत खुशियों का खजाना समाहित होता है। माँ के जीवन की धुरी तो संतान की ख़ुशी और भलाई के समीप ही चलायमान होती है। ईश्वर की सृजन की गई सृष्टि में माँ के दुलार, प्यार, स्नेह और करुणा की कोई सीमा नहीं है। माँ तो अनुरागिनी है। वात्सल्य दायिनी माँ…

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“शिवरात्रि और शिवशक्ति का आशीर्वाद”

“शिवरात्रि और शिवशक्ति का आशीर्वाद”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) महाशिवरात्रि पर हम शिवशक्ति की आराधना करते है। गृहस्थ जनों के लिए शिव परिवार एक आदर्श रूप है। शिवशक्ति के विवाह में शिव ने पार्वती की अनेकों रूप में परीक्षा ली, परन्तु माँ ने अपनी अटूट श्रृद्धा और निष्ठा शिव के प्रति न्यून न होने दी। माँ ने शिव के सच्चे स्वरुप को पहचान लिया और उनके प्रति समर्पित हो गई। गृहस्थ जीवन की श्रेष्ठता तो शिव-पार्वती की…

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सिद्धि की ओर चला जिन उपासना का सिद्ध साधक : दीपक जैन (टीनू)

सिद्धि की ओर चला जिन उपासना का सिद्ध साधक : दीपक जैन (टीनू)

“मूकमाटी” का रचियता आज मूक हो गया। इंदौर. संत कमल के पुष्प के समान लोकजीवन रूपी वारिधि में रहते हैं, संचरण करता हैं, डुबकियां लगाते हैं, किंतु डूबते नहीं हैं! यही भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, वर्तमान युग के महावीर, युग दृष्टा, संपूर्ण जीवलोक के संवाहक, जन जन की आस्था के केंद्र, राष्ट्रसंत, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन का मंत्रघोष था। आचार्यश्री ने अपने अमृत वचनों से जनकल्याण में रत व संयम साधना…

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“वैवाहिक वर्ष के सात साल (लघुकथा)”

कहते है वैवाहिक गठबंधन की शुरुआत आकर्षण एवं अंत आँखों में छुपी करुणा से होता है। रवि और रीना का परिणय बंधन भी कुछ इसी तरह समय की धुरी पर चलायमान हो रहा था। शादी एक परिपक़्व समय हुई थी, शायद इसलिए वैवाहिक जीवन की गूढ़ता को समझने में भी आसानी हुई। रवि स्वाभाव से बहुत ही शांत पर गंभीर था। पत्नी के सूक्ष्म मनोभावों को समझने का पता नहीं इतना ज्ञान उसमें कहाँ से…

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“काइरोप्रैक्टिक” के साथ करें स्वागत “ऋतुराज वसंत” का

“काइरोप्रैक्टिक” के साथ करें स्वागत “ऋतुराज वसंत” का

“काइरोप्रैक्टिक” एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जो विशेष रूप से मेरुदण्ड के यांत्रिक विकारों के सटीक उपचार के जरिए शरीर के समग्र स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है। तंत्रिका तंत्र के इन विकारों के चलते शरीर में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए सही समय पर यह ट्रीटमेंट लेना जरूरी है और ऋतुराज वसंत का आगमन, इसके लिए सबसे उपयुक्त मौसम माना जाता है। दरअसल जब आप अपनी रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य…

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“बसंत पंचमी और बच्चों की शिक्षा”

“बसंत पंचमी और बच्चों की शिक्षा”

सरस्वती माता के प्राकट्य का दिन है अत्यंत शुभ। ज्ञान प्राप्ति की पिपासा तो है जीवन में कौस्तुभ।। विद्या की अधिष्ठात्री देवी देती उत्कृष्ट जीवन का ज्ञान। माँ की नित्य आराधना तो बनाती हमें महान।। विद्या, संगीत और कला में निपुणता दिलाती उच्च स्थान। इस दिन होता माँ का पूजा-पाठ और ध्यान।। ज्ञान की स्वामिनी का हुआ इस दिन अवतरण। ज्ञान की अमूल्य धरोहर से बच्चे जीतेंगे जीवन का रण।। पीले वस्त्र धारण करने का…

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“सदियों की प्रतीक्षा का फल: राम मंदिर”

श्रीराम का जीवन हो या हो अलौकिक मंदिर निर्माण। सहने पड़े दोनों को ही अनंत संघर्षो के बाण।। जो श्रीराम करते स्वयं सृष्टि का शंखनाद। उनके जीवन और मंदिर निर्माण में आए कई विघ्न एवं विवाद।। वर्षों की प्रतीक्षा के पश्चात् ह्रदय को हर्षो-उल्लास और उमंग से भर देने वाला, नैनों में भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित करने वाला क्षण 22 जनवरी को आया। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा और उनके स्वागत के भव्य आयोजन…

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“शक्ति आराधना पर्व नवरात्रि”

“शक्ति आराधना पर्व नवरात्रि”

डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका) माँ शब्द में ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड समाहित है। यह सृष्टि भी तो हमारी माँ ही है, जो हमारा लालन-पालन और भरण-पोषण करती है। उदार भाव से हमारे उत्थान को प्रबलता प्रदान करती है। इसी भाव के कारण हम सदैव पूजा-अर्चना में सर्वप्रथम पृथ्वी माँ को ही प्रणाम करते है। इस समय तो ममतामयी माँ शेर पर सवारी कर भक्तों के कल्याण के लिए आई है। हमें सकारात्मक ऊर्जा…

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