- "अर्थव्यवस्था पर भी बन सकती है दमदार फिल्म" – 'गवर्नर' को लेकर बोले निर्देशक चिन्मय मांडलेकर
- “Economics Can Be as Dramatic as War”: Chinmay Mandlekar on Directing Governor
- Akshay Kumar turns back the clock with helicopter stunt in Welcome To The Jungle; proves why he'll always be Bollywood's original Khiladi
- “The Best Phase of My Career Is What I'm Building Next”: Mansi Bagla on Four Years of Mini Films
- From Rohit Saraf to Ishaan Khatter: Young Bollywood Actors With Exciting Upcoming Lineups
“ध्यान की उत्कृष्ट पराकाष्ठा : शिव”
शिव ईश्वर का सत्यम-शिवम-सुंदरम रूप है। शिव वो है जो सहजता एवं सरलता से सुशोभित होते है। वे ऐसे ध्यानमग्न योगीश्वर है जो नीलकंठ बनकर अपने भीतर विष को ग्रहण किए हुए है और भुजंगधारी बनकर विष को बाहर सजाए हुए है। इसके विपरीत भी उमापति की एकाग्रता, शांतचित्त रूप और ध्यान में कहीं भी न्यूनता परिलक्षित नहीं होती। वैभव देने वाले भोलेनाथ स्वयं वैरागी रूप में विराजते है। ध्यान की उत्कृष्ट पराकाष्ठा शिव अपने आराध्य श्रीराम के स्वरूप को अपने भावों की माला से ध्याते है। सृष्टि के कल्याण के लिए शांत भाव और सहजता से विषपान को स्वीकार करते है।
हे गंगाधर, भुजंगभूषण, सर्वज्ञ; तुम हो ध्यान की उत्कृष्ट पराकाष्ठा।
हे भक्तवत्सल तुममे तो है श्रीराम के प्रति अनन्य निष्ठा॥
शिव स्वरूप मोहमाया के मिथ्या रूप को जानते है, इसलिए सदैव ध्यान की प्रेरणा देते है। जीवन का अंतिम ध्येय शांतचित्त स्वरूप होना है। आशुतोष जो केवल जलधारा से प्रसन्न हो जाए, जो द्रव्य हर किसी के लिए सहजता से उपलब्ध हो जाए वही शिव स्वीकार कर मनोवांछित फल प्रदान करते है। प्रत्येक आडंबर से मुक्त जगतगुरु जीवन के सत्य से साक्षात्कार कराते है। शिव संदेश देते है की हम स्वयं पर ध्यान केन्द्रित करके उन्नति के आयाम को खोज सकते है। स्वयं के आनंद स्वरूप को पहचान सकते है। हमें अपनी ऊर्जा को स्वयं के भीतर ही बढ़ाना है। स्वयं में ही आनंद के क्षण को खोजना है।
सृष्टि के कल्याण के लिए तुम तो हो सदैव समर्पित।
भक्त से चाहते केवल भावों की माला अर्पित॥
शिव से उच्च स्थान किसी को भी प्राप्त नहीं है। उन्हें स्वयं देवताओं ने महादेव के संज्ञा दी है। उनके ध्यानमग्न स्वरूप में अंतरआनंद की छवि समाहित है जो त्याग की प्रतिदीप्ति एवं सत्य स्वरूप है। शिव सत्य के स्वरूप को अंगीकार करते है, जो कृपानिधान आशुतोष सर्वज्ञ है उन्हीं शिव तत्व में जीवन का सार समाहित है। ध्यान स्वरूप शिव अन्तर्मन की शक्तियों को जाग्रत करने की प्रेरणा देते है। स्वयं के स्वरूप को जानकर ही हम जीवन को श्रेयस्कर रूप प्रदान कर सकते है। विषम परिस्थितियों में भी ध्यान की उत्कृष्टता के निर्वाहक है शिव।
कैलाशवासी, जटाधारी, रुद्र तुम कराते सत्य से साक्षात्कार।
डॉ. रीना कहती, ईश आराधना से साधक करता भवसागर को पार॥
डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)


