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शालिनी ताई मोघे व्याख्यान श्रृंखला का समापन, अनुराधा प्रभुदेसाई ने बच्चों में जगाया राष्ट्रसेवा का भाव
भारतीय सेना के शौर्य प्रसंगों के माध्यम से अनुशासन, कर्तव्य और देशभक्ति का दिया संदेश
इंदौर, 1 जुलाई 2026। पद्मश्री स्वर्गीय शालिनी ताई मोघे की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बाल निकेतन संघ द्वारा आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला का बुधवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन लक्ष्य फाउंडेशन, पुणे की संस्थापक अनुराधा प्रभुदेसाई ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थित नागरिकों को भारतीय सेना के अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरक गाथाओं से परिचित कराया। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कारगिल युद्ध सहित सीमाओं पर तैनात सैनिकों के संघर्ष, समर्पण और बलिदान के अनेक प्रेरक प्रसंग साझा किए, जिन्हें उपस्थित बच्चों और युवाओं ने अत्यंत भावुकता और उत्साह के साथ सुना।
अनुराधा प्रभुदेसाई ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपने जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सेना के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। यही अनुशासन और समर्पण प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का भी आधार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपने जीवन में अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित कर लें तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
प्रभुदेसाई ने बताया कि वर्ष 2004 में लद्दाख की यात्रा के दौरान उन्हें यह अनुभव हुआ कि कारगिल युद्ध की वीरगाथाएं देश के आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सकी हैं। इसी विचार ने उन्हें वर्ष 2009 में लक्ष्य फाउंडेशन की स्थापना के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारी के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर स्वयं को पूर्णकालिक रूप से इस कार्य के लिए समर्पित कर दिया। तब से वे देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों में भारतीय सेना के शौर्य, सैनिकों के जीवन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों पर प्रेरक व्याख्यान देती आ रही हैं।
उन्होंने बताया कि लक्ष्य फाउंडेशन के माध्यम से अब तक 900 से अधिक प्रेरक प्रस्तुतियां आयोजित की जा चुकी हैं। कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों की गाथाओं पर आधारित पुस्तिकाएं हजारों विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई हैं। सैनिकों के सम्मान में दिवाली जैसे विशेष कार्यक्रमों के साथ युवाओं और सेना के अधिकारियों के बीच संवाद भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, ताकि नई पीढ़ी में देशभक्ति और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत हो सके।
बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा, “दो दिनों तक चली इस व्याख्यान श्रृंखला ने शालिनी ताई मोघे के शिक्षा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचारों को नई ऊर्जा के साथ समाज के सामने प्रस्तुत किया। पहले दिन ग्रामीण शिक्षा और समाजसेवा पर सार्थक संवाद हुआ, जबकि दूसरे दिन अनुराधा प्रभुदेसाई ने राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और कर्तव्य की भावना से बच्चों और युवाओं को प्रेरित किया। हमें विश्वास है कि इस व्याख्यान श्रृंखला से प्राप्त विचार प्रतिभागियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनेंगे।”
डॉ. अदमणे ने बड़े ताई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “शालिनी ताई मोघे ने अपना संपूर्ण जीवन बाल शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समाजसेवा को समर्पित किया। उनके विचार और कार्य आज भी हमारे लिए मार्गदर्शक हैं। यह व्याख्यान श्रृंखला उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि के साथ उनके जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास है। पहले दिन भारती ठाकुर ने ग्रामीण शिक्षा और सामाजिक विकास का प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया, जबकि आज अनुराधा प्रभुदेसाई ने भारतीय सैनिकों के शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना से बच्चों और युवाओं को प्रेरित किया। हमें विश्वास है कि शालिनी ताई का सेवा और शिक्षा का यह संदेश आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित विद्यार्थियों ने भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। बाल निकेतन संघ ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए शालिनी ताई मोघे के शिक्षा और समाजसेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।


