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भजनों के साथ धूमधाम से निकली दिण्डी यात्रा
कृष्णपुरा छत्री से पंढरीनाथ मंदिर तक रास्तेभर गूंजे ज्ञानबा श्रीहरि विट्ठल के जयघोषदिण्डी यात्रा में विदेश से आई युवती ल्योला (इटली) ने भी पालकी का पूजन किया और फुगड़ी खेली16 हाथ की साड़ी एवं पारम्परिक गहने पहनकर महिलाएं भजन गाते हुए चल रही थी
इन्दौर। माझे माहेर पंढरी आहे भिवरेच्या तिरी…. समीपही दिसे पंढरी…. चालला गजर जाहलो आधिर…, लगली नजर कळसाल…., विट्ठल माऊली, तु माऊली…. जैसे मराठी अभंग और भजनों के साथ समग्र मराठी समाज मध्यप्रदेश इन्दूर की भव्य दिण्डी यात्रा कृष्णपुरा छत्री से निकली।
यात्रा में विट्ठलरुखमाई पर केन्द्रित पालकी सभी के लिए श्रद्धा का केन्द्र रही। पालकी का पूजन विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व जस्टिज श्री वी.एस. कोकजे, प.पू. अण्णा महाराज, प.पू. रामचन्द्र अमृतलफ ले महाराज, दादू महाराज, प.पू. स्वामी ऐश्वर्यानंद सरस्वती, प. पू. बापू मोतीवाले महाराज, प.पू. श्यामराव सालुंके, प.पू. राम कोकजे गुरुजी (गोंदवलेधाम), प.पू. विवेक बर्वे गुरूजी, सुनील शा ी ने किया।
इस मौके पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन (ताई), भाजपा सांसद शंकर लालवानी, महापौर मालिनी गौड़ और म.प्र. गृह निर्माण मंडल के पूर्व अध्यक्ष कृष्णमुरारी मोघे मुख्य बतौर उपस्थित थे। दिण्डी यात्रा में भारतीय संस्कृति से अभिभूत विदेश से आई युवती ल्योला (इटली) ने ना केवल पालकी का पूजन किया वरन् मराठी महिलाओं के साथ में फुगड़ी खेली और पूरे समय तक साथ में रही।
दिण्डी यात्रा में शेखर नगर और बाराभाई की पालकी भी शामिल हुई। नंदानगर से आए युवकों ने लेजिम बजाते हुए यात्रा में शामिल हुए और रास्ते भर थिरकते और जय विट्ठल, हरि विट्ठल के उद्घोष लगाते हुए चल रहे थे।यह जानकारी यात्रा संयोजक विनीता धर्म एवं कमलेश नाचन ने दी। उन्होंने बताया कि आज शाम को आषाढ़ी एकादशी पर कृष्णपपुरा छत्री पर पंढरपुर (महाराष्ट्र) जैसा श्रद्धा और भक्ति से भरा माहौल दिखाई दिया।
आज उसका लघु रूप कृष्णपुरा छत्री से लेकर पंढरीनाथ मंदिर तक दिखाई दिया। दिंडी यात्रा में शामिल महिलाएं 16 हाथ की साड़ी और पारम्पिक गहने पहनकर ज्ञानबा हरिविट्ठल के जयघोष करते हुए चल रही है। वहीं पुरुष वर्घ सिर पर सफेद टोपी, पारम्पिक वैषभूषा में शामिल थे।अभंग एवं भजन गायक गले में टाळ, मृदंग, हाथों में ढपली व झांज बजाते हुए श्रद्धा के साथ संत तुकाराम श्री हरिवट्ठल के जयघोष करते हुए चल रहे थे।
दिण्डी यात्रा शुरू होने के पहले मराठी समाज की कई महिलाओं ने मंच पर मराठी भाषा में स्वरबद्ध अभंग गाए और यात्रा मार्ग पर फुगड़ी खेली।अतिथियों का स्वागत मधुकर गौरे, भूपेन्द्र पराडक़र, कमलेश नाचन, विनोत थोरात, विनय पिंगले, भालचन्द होलकर, सुभाष मापारे, अनिल गावण्डे, पुष्प परांजपे ने किया।
दिण्डी यात्रा में चन्द्रकांत पराडक़र, मिलिंद महाजन, अश्विन खरे, अशोक आमणापुरकर, उजवला बापट, मिलिंद दिघ, सावन बोरले, सागर गुंजाल, दिवाकर घायल सहित बड़ी संख्या में विभिन्न मराठी समाज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन विनीता धर्म ने किया और अंत में आभार माना कमलेश नाचन ने। यात्रा में शामिल मराठी समाजजन सिर पर सफेद टोपी और गले में दुपट्टा पहने हुए चल रहे थे। अधिकांश महिलाओं और पुरुषों केसरिया और पीले रंग का साफा बांध माहौल को पूरा भक्तिमय कर दिया। दिण्डी यात्रा में आगे-आगे बैण्ड-बाजे, ढोल-तासे की थाप पर समग्र मराठी श्रद्धाभक्ति में थिरकते हुए चल रहा था।


