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एचडीएफसी बैंक के परिवर्तन अभियान ने मध्य प्रदेश में 63 लाख से ज़्यादा लोगों के जीवन को प्रभावित किया
राज्य के 55 में से 38 ज़िलों में प्रभाव, जिनमें सभी 8 आकांक्षी ज़िले हैं शामिल
भोपाल, मध्य प्रदेश, 20 अगस्त, 2025: भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक ने अपनी सीएसआर शाखा परिवर्तन बैंक के माध्यम से अब तक मध्य प्रदेश में 63.72 लाख से ज़्यादा लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। बैंक 2015 से राज्य में सक्रिय है और मध्य प्रदेश के 55 में से 38 ज़िलों को कवर करता है। बैंक ने परिवर्तन के अंतर्गत निम्नलिखित छह प्रमुख क्षेत्रों को अपनाया है:
ग्रामीण विकास
शिक्षा को बढ़ावा देना
कौशल प्रशिक्षण एवं आजीविका संवर्धन
स्वास्थ्य सेवा एवं स्वच्छता
वित्तीय साक्षरता एवं समावेशन
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन
मध्य प्रदेश में, ग्रामीण विकास, शिक्षा को बढ़ावा देना तथा कौशल प्रशिक्षण एवं आजीविका संवर्धन ने सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। 69,000 से अधिक किसान, 26,000 छात्र और 17,000 प्रशिक्षित व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं। मध्य प्रदेश में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की छाप –
एचडीएफसी बैंक के परिवर्तन कार्यक्रम ने मध्य प्रदेश में एक मज़बूत और निरंतर उपस्थिति दर्ज की है, जो राज्य के 55 में से 38 ज़िलों में चल रही और बंद हो चुकी परियोजनाओं के माध्यम से फैला है। बैंक ने राज्य के सभी आकांक्षी ज़िलों में परियोजनाओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है, जिनमें बड़वानी, छतरपुर, दमोह, गुना, खंडवा, राजगढ़ और विदिशा में परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और बड़वानी, गुना, खंडवा और सिंगरौली में प्रयास जारी हैं।
कुल मिलाकर 33 ज़िलों में परियोजनाएँ सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं जबकि 17 ज़िलों में वर्तमान में सक्रिय हस्तक्षेप चल रहे हैं। टीकमगढ़ और उज्जैन में आगामी परियोजनाओं की योजना बनाई गई है।
बैंक का प्रमुख समग्र ग्रामीण विकास कार्यक्रम, जो सभी 6 प्रमुख क्षेत्रों में एकीकृत हस्तक्षेप पर केंद्रित है, ने अलीराजपुर, अशोकनगर, भोपाल, छिंदवाड़ा, देवास, इंदौर, खरगोन और सीहोर के 165 गाँवों को प्रभावित किया है।
इसके अतिरिक्त केंद्रित विकास कार्यक्रम, जहाँ बैंक किसी लक्षित भौगोलिक क्षेत्र में किसी एक या दो प्रमुख फोकस क्षेत्रों के अंतर्गत विशिष्ट हस्तक्षेप करता है, आगर मालवा, बालाघाट, भोपाल, छतरपुर, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंडला, मंदसौर, पन्ना, सतना, सिंगरौली और उमरिया जिलों में कार्यान्वित किए गए हैं।
एचडीएफसी बैंक की सीएसआर प्रमुख सुश्री नुसरत पठान ने कहा, “एचडीएफसी बैंक में हमारा मानना है कि सीएसआर एक ही तरह का दृष्टिकोण नहीं है। परिवर्तन के माध्यम से हम आवश्यकता-आधारित हस्तक्षेपों को डिज़ाइन और कार्यान्वित करते हैं जो प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करते हैं। मध्य प्रदेश में हमारा कार्य इस दर्शन को दर्शाता है, जिसमें किसानों को टिकाऊ कृषि के साथ समर्थन देने से लेकर शिक्षा, कौशल और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना शामिल है। हम समावेशी विकास को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर स्थायी प्रभाव डालने में एक छोटी सी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
एचडीएफसी बैंक के मध्य प्रदेश शाखा बैंकिंग प्रमुख श्री प्रतीक शर्मा ने कहा, “हम मध्य प्रदेश में बैंकिंग सेवाओं की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने के लिए समर्पित हैं ताकि सभी के लिए इनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिक के रूप में, एचडीएफसी बैंक व्यक्तियों और परिवारों में सार्थक बदलाव लाने पर समान रूप से केंद्रित है।
एचडीएफसी बैंक मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए भारत में सबसे अधिक सीएसआर खर्च करने वालों में से एक था। बैंक ने 31 मार्च 2025 तक देश भर में सीएसआर पहलों पर 1,068 करोड़ रूपये खर्च किए थे। बैंक ने परिवर्तन कार्यक्रम के तहत देश भर में 10.56 करोड़ रुपये से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

मध्य प्रदेश में प्रमुख हस्तक्षेप-
जल संरक्षण –
अनियमित वर्षा, ढलान वाली और बंजर भूमि और वर्षा आधारित खेती पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राज्य के बड़े हिस्से बार-बार पानी की कमी का सामना करते हैं। कुछ इलाके उच्च लौह और आर्सेनिक स्तर के कारण खराब पेयजल गुणवत्ता से भी जूझते हैं। ये चुनौतियाँ कृषि, स्वास्थ्य और आजीविका को सीधे प्रभावित करती हैं।
मध्य प्रदेश में, परिवर्तन हस्तक्षेप जल सुरक्षा से शुरू होते हैं। 2000 से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है जिससे 37000 एकड़ भूमि सिंचाई के अंतर्गत आ गई है। अशोकनगर, सीहोर और खरगोन जैसे जिलों में परियोजनाएँ भूमि उपचार को सूक्ष्म सिंचाई, सौर जल कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए पंप और चिनाई वाले स्टॉप डैम का उपयोग किया जा रहा है। खरगोन जैसे जल-गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में फ़िल्टरेशन इकाइयों वाली सौर ऊर्जा चालित जल मीनारें सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करा रही हैं, जबकि सिंगरौली और उमरिया में वाटरशेड पहल भूजल की भरपाई कर रही हैं, कटाव को कम कर रही हैं और खेती और दैनिक जीवन दोनों के लिए पहुँच सुनिश्चित कर रही हैं।
अशोकनगर में सतत कृषि के माध्यम से किसानों का सशक्तिकरण –
विश्वसनीय जल आपूर्ति के साथ किसानों को खेती में बेहतर तकनीकों को अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन अशोकनगर के चंदेरी ब्लॉक में अभ्युदय संस्थान के साथ साझेदारी में ग्रामीण आजीविका में बदलाव ला रहा है। जो किसान पहले अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते थे, अब सतत खेती, नकदी फसलों की खेती, आधुनिक तकनीकों और जैविक प्रथाओं के माध्यम से अपनी आय में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि देख रहे हैं।
इस पहल ने 4,000 एकड़ में सिंचाई की सुविधा प्रदान की है, 15 गाँवों को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान की है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए 5,000 पेड़ लगाए हैं। 1,800 सेअधिक किसान और उनके परिवार 75 महिला-नेतृत्व वाले सामुदायिक उद्यमों, 65 समुदाय-आधारित संस्थानों और पांच स्मार्ट स्कूलों के गठन से लाभान्वित हो रहे हैं।
सीहोर में बहु-स्तरीय खेती के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि –
सीहोर के 20 गाँवों में, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन, अर्पण सेवा संस्थान के सहयोग से, बहु-स्तरीय कृषि तकनीकों को लागू कर रहा है जो कृषि को नया रूप दे रही हैं। इस पद्धति से फलों और सब्जियों को छोटे-छोटे भूखंडों पर एक साथ उगाया जा सकता है, जिससे पूरे वर्ष निरंतर उपज और स्थिर आय सुनिश्चित होती है।
यह प्रणाली लागत-प्रभावी है, छोटे खेतों के लिए आदर्श है और सूक्ष्म सिंचाई के अनुकूल है। किसानों को बीज चयन, जैविक खाद बनाने और जल के कुशल उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया है। परिणामस्वरूप, मौसमी आय 9,000 रूपये से बढ़कर 1,20,000 रूपये हो गई है।
अन्य पहल –
खंडवा जिले के खालवा ब्लॉक में सहजन की खेती की पहल कुपोषण से निपटने के साथ-साथ किसानों को मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए लाभदायक फसल प्रदान कर रही है। कृषि आय और स्वास्थ्य पर यह दोहरा ध्यान परिवर्तन के एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाता है।
मालवा और गुना में डेयरी सहकारी समितियों और बाजरा-आधारित उद्यमों सहित आजीविका संबंधी पहल छोटे उद्यमियों को स्थायी आय सुनिश्चित करने में सक्षम बना रही हैं।
एचडीएफसी बैंक ने आजीविका और स्थानीय शक्तियों के बीच इस संबंध को मज़बूत करते हुए हथकरघा बुनाई जैसी गैर-कृषि आर्थिक गतिविधियों को भी समर्थन दिया है। प्राण में सौर ऊर्जा से चलने वाले हथकरघों ने माहेश्वरी और चंदेरी साड़ियों की बुनाई को पुनर्जीवित किया है। महिलाओं को आधुनिक सुविधाएँ, बाज़ार तक पहुँच और बेहतर आय प्रदान की जा रही है।


