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HEALTHCON 2026: छह चिकित्सा विधाओं का संगम, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने किया मंथन
डॉ. ए.के. द्विवेदी का संदेश – “Gen Z को Great Z बना सकते हैं, जरूरत है उन्हें सुनने, समझने और सही दिशा देने की”
इंदौर। चोइथराम आई हॉस्पिटल, धार रोड, इंदौर में चोइथराम फाउंडेशन एवं एडु सीरम ग्रुप ऑफ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय समग्र स्वास्थ्य सम्मेलन HEALTHCON 2026 (National Holistic Health Conference 2026) का आयोजन किया गया।
सम्मेलन के मुख्य सूत्रधार एवं आयोजन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले डॉ. अश्विनी वर्मा एवं डॉ. ऊषा उकांडे रहे। उनके प्रयासों से आयोजित इस सम्मेलन में होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी, योग, नेचुरोपैथी एवं नर्सिंग सहित स्वास्थ्य क्षेत्र की छह प्रमुख विधाओं के विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि इंदौर जोन के कमिश्नर श्री भास्कर लक्ष्यकार थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आनंद चतुर्वेदी, सदस्य, मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB), नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी, नई दिल्ली उपस्थित रहे।
डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष परिचर्चा
सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा “An Integrated Approach to Child Mental Health in the Digital Age” आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. ए.के. द्विवेदी ने की।
परिचर्चा में आयुर्वेद से डॉ. अखिलेश भार्गव, नेचुरोपैथी से डॉ. हेमांशु शर्मा NIN Pune, योग से डॉ. विवेक माहेश्वरी yog university Ahamadabad, नर्सिंग से श्रीमती दीपमाला देब तथा यूनानी चिकित्सा से डॉ. नौरीन अनस ने भाग लिया।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल युग में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौती बनता जा रहा है। मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, नींद की कमी, शारीरिक गतिविधियों में कमी, पढ़ाई का दबाव तथा पारिवारिक संवाद की कमी बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
Gen Z को Great Z बनाने की आवश्यकता
डॉ. ए.के. द्विवेदी ने अपने संबोधन में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि “हम Gen Z को Great Z बना सकते हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि हम उनसे सही तरीके से संवाद करें, उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनें, उन्हें समझें और उनके विचारों पर मनन करें।”
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी पिछले सात दशकों की तुलना में डिजिटल तकनीक का कहीं बेहतर उपयोग करना जानती है। तकनीक के प्रभावी उपयोग के कारण उनके कार्य करने का तरीका अधिक स्मार्ट और कुशल हुआ है तथा उनकी डिजिटल एवं तकनीकी स्किल्स भी बेहतर हुई हैं।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की क्षमताओं को नकारने के बजाय उन्हें समझने, प्रोत्साहित करने और सही दिशा देने की आवश्यकता है। माता-पिता एवं शिक्षकों को बच्चों के साथ संवाद का ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। पीढ़ियों के बीच संवाद की दूरी कम करके ही बच्चों की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिभा को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
मंत्र जाप, योग और होम्योपैथी का उल्लेख
अपने टेक-अवे होम संदेश में डॉ. द्विवेदी ने बच्चों में मानसिक शांति, सकारात्मक सोच एवं एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग, ध्यान तथा ॐ और महामृत्युंजय मंत्र के जाप जैसे अभ्यासों को दिनचर्या में शामिल करने की बात कही।
उन्होंने होम्योपैथी की औषधियों कैमोमिला (Chamomilla) एवं सिना (Cina) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि औषधियों का चयन बच्चे के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर योग्य चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। ADHD, ऑटिज्म एवं अन्य व्यवहार संबंधी समस्याओं में समय पर विशेषज्ञ से मूल्यांकन और उचित उपचार प्राप्त करना भी आवश्यक है।
डॉ. ए.के. द्विवेदी का सम्मान
सम्मेलन के दौरान चिकित्सा, शिक्षण, शोध एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पैनल चेयरपर्सन डॉ. ए.के. द्विवेदी को सम्मानित किया गया। उन्होंने इस सम्मान के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेमंत शर्मा ने किया। सम्मेलन में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सम्मेलन का प्रमुख संदेश रहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विधाओं के बीच समन्वय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जागरूकता और जनभागीदारी आवश्यक है। विशेषकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए परिवार, विद्यालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को मिलकर कार्य करना होगा।


