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नौ रसों की भावाभिव्यक्ति और नृत्य से सजीं नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियाँ
इंदौर। किडर बड्स स्कूल का वार्षिकोत्सव ‘नवरस: भावनाओं का उत्सव–भावोत्सव’ भारतीय संस्कृति, कला और भावनाओं का अनूठा संगम बना। प्री-नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों ने नृत्य एवं अभिनय के माध्यम से शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत और शांत रसों को जीवंत कर दर्शकों का मन मोह लिया।
‘देवा श्री गणेशा’, ‘गंगा अवतरण’, ‘राधा गोरी गोरी’, ‘वो कृष्णा है’, ‘सिंघम’, ‘सूर्यवंशम’ और ‘जगन्नाथ’ जैसी प्रस्तुतियों में बच्चों ने भक्ति, शौर्य, उल्लास और संवेदनाओं के विविध रंग बिखेरे। कोरियोग्राफर श्रीमती सीमा सेन के मार्गदर्शन में लगभग पांच माह के अभ्यास से तैयार इन प्रस्तुतियों में बच्चों का आत्मविश्वास, नृत्य-कौशल और भावाभिव्यक्ति विशेष रूप से सराहनीय रही।
श्री नरेशफुंदवानी ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को नई दिशा देते हैं। आईटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश उपाध्याय ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में श्रीमती चांदनी फुंदवानी, श्रीमती श्वेता उपाध्याय, श्री संजय पंजवानी, सुश्री आशीष पटेल, सुश्री प्रियंका तिवारी, डॉ. वंदना मिश्रा एवं श्री पुनीत जैन उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्पोकन इंग्लिश एंड लाइफ स्किल्स के समापन बैच के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। राम पगारानी एवं वंश वाधवानी ने अपने अनुभव साझा किए। समापन पर बच्चों की माताओं एवं शिक्षिकाओं ने भगवान शिव पर आधारित विशेष प्रस्तुति दी।
संस्था के निदेशक डॉ. धीरज हसीजा एवं प्राचार्य डॉ. दीपिका हसीजा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन रेणुका जोशी ने किया तथा आभार डॉ. दीपिका हसीजा ने माना।
वार्षिकोत्सव ने संदेश दिया कि कला और संस्कृति बच्चों में संस्कार, संवेदनशीलता, रचनात्मकता एवं आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं।


