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बीमारी की सही पहचान से सुरक्षित इलाज तक: इंदौर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 के पहले दिन पेशेंट सेफ्टी और इनोवेशन पर हुआ गहन मंथन
मध्य प्रदेश में पहली बार डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखकर हो रही इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का प्रभावशाली आगाज़
मध्य प्रदेश में पहली बार डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस
डायग्नोस्टिक के सभी विंग्स के लिए सीख, सुधार और भविष्य की तैयारी का मंच
देशभर से 1500 से अधिक हेल्थकेयर व डायग्नोस्टिक प्रोफेशनल्स तथा स्टूडेंट्स की भागीदारी
मुख्य अतिथि: श्री शंकर लालवानी (लोकसभा सांसद), वर्चुअल रूप से श्री राजेंद्र शुक्ला (स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश) उपस्थित
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और काहो के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
इंदौर, 24 जनवरी, 2026: मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों के संघ (काहो/सीएएचओ) की प्रमुख राष्ट्रीय डायग्नोस्टिक कॉन्फ्रेंस काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का आज इंदौर में प्रभावशाली शुभारंभ हुआ। लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह (डीएवीवी) में आयोजित इस दो दिवसीय आयोजन का पहला दिन पूरी तरह इस बात पर केंद्रित रहा कि सही जाँच, सुरक्षित प्रक्रियाएँ और आधुनिक तकनीकें मिलकर मरीजों के इलाज को कैसे बेहतर और भरोसेमंद बना सकती हैं। मध्य प्रदेश में पहली बार इस स्तर पर डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखकर यह राष्ट्रीय संवाद शुरू हुआ है। मरीज के अस्पताल में कदम रखने से लेकर बाहर जाने तक के तमाम सेफ्टी मेजर्स पर गहन चर्चा की गई।
लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर इस आयोजन को गौरवान्वित किया। वहीं, मध्य प्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला वर्चुअल रूप से उपस्थित रहे। इसके बाद क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और काहो के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।डॉ. जक्षय शाह, अध्यक्ष, क्यूसीआई किसी कारणवश सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि, उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्डेड संदेश के माध्यम से प्रतिनिधियों को संबोधित किया और सम्मेलन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
विशेष अतिथि लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी ने इस आयोजन को इंदौर और पूरे प्रदेश के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। सही इलाज और उससे पहले सही जाँच का होना एक बेहतर स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक जरुरी है। और काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 की वजह से यह और भी बढ़ेगी। मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि जब लगभग सत्तर प्रतिशत चिकित्सीय निर्णय जाँच रिपोर्ट्स पर आधारित होते हैं, तब डायग्नोस्टिक की गुणवत्ता और सुरक्षा सीधे मरीज के जीवन से जुड़ जाती है।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनिता कोठारी, सेक्रेटरी, काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन एवं फाउंडर-डायरेक्टर, सेंट्रल लैब, इंदौर के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। डॉ. विनिता कोठारी ने कॉन्फ्रेंस में उपस्थित सभी विशेषज्ञों, वक्ताओं और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस मंच पर हजारों की संख्या में ऐसे लोग जुड़े हैं, जो पहले से ही गुणवत्ता को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। ऐसे आयोजनों में वही लोग आते हैं, जो बदलाव में विश्वास रखते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी समझते हैं। काहो डायग्नोस्टिकॉन अपने आप में इसलिए अनूठा है, क्योंकि यहाँ गुणवत्ता को सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। यदि यहाँ मौजूद हर व्यक्ति गुणवत्ता की सोच को अपने-अपने संस्थान तक भी पहुँचा देता है, तो यह आयोजन अपने उद्देश्य में सफल माना जाएगा।
दिन की शुरुआत काहो एंथम और स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसे काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन की चेयरमैन डॉ. अपर्णा जयराम ने संबोधित किया। इसके बाद दीप प्रज्वलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के स्वास्थ्य, डायग्नोस्टिक और अकादमिक जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर काहो के पैट्रन डॉ. वेंकटेश थुप्पिली, एनएबीएल-क्यूसीआई के चेयरपर्सन डॉ. संदीप शाह, अमलतास मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया, काहो के प्रेसिडेंट डॉ. विजय अग्रवाल, सेक्रेटरी जनरल डॉ. लल्लू जोसेफ, वाइस प्रेसिडेंट्स डॉ. संकर सेनगुप्ता और डॉ. अशोक रत्न, डायग्नोस्टिक डिवीजन की चेयरमैन डॉ. अपर्णा जयराम और सेक्रेटरी डॉ. विनिता कोठारी सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर मौजूद रहे। इसके साथ ही एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के फाउंडर वाइस चांसलर डॉ. डी. पी. लोकवानी, आईएमएस-डीएवीवी के डायरेक्टर डॉ. दीपक श्रीवास्तव, आईएमएस के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सी. सी. मोतियानी, डॉ. अशोक रत्न, डॉ. रवि गौर, टाटा इम्यूनोलॉजी लैब्स से डॉ. प्रशांत नाग, एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, भोपाल के रजिस्ट्रार डॉ. आर. के. चौरसिया और एलएनसीटी यूनिवर्सिटी, इंदौर के रजिस्ट्रार डॉ. प्रशांत पुरोहित एवं डॉ. विनोद भंडारी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। दीप प्रज्वलन के साथ ही सम्मेलन के औपचारिक शुभारंभ ने यह संदेश दिया कि काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 गुणवत्ता, पेशेंट सेफ्टी और भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को लेकर एक मजबूत साझा मंच है।
इस दिन कुल 13 महत्वपूर्ण तकनीकी और विचारात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें डायग्नोस्टिक्स से जुड़े जरूरी और मौजूदा विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। पहले सत्र में ‘डायग्नोस्टिक्स में पेशेंट सेफ्टी 2026: सही जाँच से सुरक्षित इलाज तक’ विषय पर बात हुई, जिसमें डॉ. विनिता कोठारी, डॉ. अपर्णा जयराम, टीबी रिसर्च से जुड़ी विशेषज्ञ डॉ. भाविनी शाह, डॉ. संजय दीक्षित और एनएबीएल के चेयरमैन डॉ. संदीप शाह ने अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद मुख्य वक्तव्य सत्र में लैब्स में नेतृत्व की भूमिका और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की गई। आगे के सत्रों में कैंसर के इलाज में आईडीएच बायोमार्कर की भूमिका, डायग्नोस्टिक लैब्स में पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी, सीआरआईएसपीआर तकनीक के जरिए मॉलिक्यूलर जाँच को आसान बनाने, बेसिक सीबीसी से आगे बढ़कर पेशेंट केयर में बेहतर पैरामीटर्स जोड़ने, माइक्रोबायोलॉजी में पीसीआर और एनजीएस में सही विकल्प चुनने, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, ब्लड सेफ्टी के लिए एनएटी टेस्टिंग, डायग्नोस्टिक क्वालिटी को बेहतर बनाने में ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भविष्य के अनुसार स्मार्ट लैब ऑटोमेशन और आने वाले समय के लिए सस्टेनेबल डायग्नोस्टिक इनोवेशन जैसे विषय शामिल रहे। इन सभी सत्रों ने यह साफ संदेश दिया कि बेहतर और सुरक्षित डायग्नोस्टिक सिस्टम ही मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं की नींव है।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. डी. पी. लोकवानी ने कहा, “इस आयोजन को माननीय सांसदों और जनप्रतिनिधियों से जो समर्थन मिला है, उसके लिए काहो पूरे मन से आभारी है। काहो और एनएबीएल के बीच शुरू हुआ यह सहयोग अपने आप में ऐतिहासिक है और विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में हर एक प्रयोगशाला अपने संबंधित नियामक और गुणवत्ता मानकों से जुड़कर काम करेगी, जिससे देशभर में डायग्नोस्टिक सेवाओं की विश्वसनीयता और मजबूती और बढ़ेगी। आज जो संवाद और चिंतन शुरू हुआ है, वह यहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर दूरगामी होगा। आज यहाँ बैठे लगभग डेढ़ सौ से अधिक विशेषज्ञ और प्रोफेशनल्स भविष्य की उस दिशा को तय करेंगे, जिसमें गुणवत्ता, सुरक्षा और नैतिकता सबसे ऊपर होंगी। विषय आधारित कॉन्फ्रेंस तो कई होती हैं, लेकिन यह कॉन्फ्रेंस इसलिए खास है, क्योंकि इसमें सिर्फ आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की जरूरतों पर बात हो रही है।”
उन्होंने डॉ. विनिता कोठारी और डॉ. अपर्णा जयराम की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता के बिना इस स्तर का आयोजन संभव नहीं था। साथ ही उन्होंने उस शहर को भी बधाई दी, जिसे क्वालिटी एश्योरेंस अवॉर्ड मिला है और जो आज गुणवत्ता का उदाहरण बनकर सामने आया है। उन्होंने अथर्ववेद की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य तक समान और सुलभ पहुँच हर व्यक्ति का अधिकार है और डायग्नोस्टिक सेवाओं की भूमिका इसमें सबसे अहम् है। उन्होंने पूरी काहो टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए सभी को भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और विश्वास जताया कि यह पहल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगी।
काहो ने यह भी दोहराया कि अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स में पेशेंट सेफ्टी से जुड़ी ट्रेनिंग पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाएगी, ताकि सुरक्षित देखभाल हर स्तर पर सुनिश्चित हो सके। देशभर से प्राप्त 1600 से अधिक रजिस्ट्रेशन इस बात का प्रमाण हैं कि यह कॉन्फ्रेंस डायग्नोस्टिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बन चुकी है।
पहले दिन की चर्चाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 सिर्फ एक पेशेवर आयोजन नहीं, बल्कि भारत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मरीज-केंद्रित डायग्नोस्टिक प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस राष्ट्रीय पहल है।


