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इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी कॉन्क्लेव में समावेशी आवासीय देखभाल पर ज़ोर दिया
दिल्ली: इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी), जो ऑटिज़्म और संबंधित विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के समर्थन के लिए समर्पित एक अग्रणी गैर-लाभकारी संगठन है, ने प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी (असिस्टेड लिविंग फैसिलिटी ऑर्गनाइजेशन्स कंसोर्टियम) कॉन्क्लेव में भाग लिया। यह एक दिवसीय संगोष्ठी थी, जिसका उद्देश्य विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए असिस्टेड लिविंग पर संवाद को आगे बढ़ाना था। वर्तमान में ‘सामावेश’ का विकास करते हुए जो न्यूरोडाइवर्स व्यक्तियों के लिए भारत का सबसे बड़ा आजीवन आवासीय देखभाल तंत्र बनने की दिशा में है आईएसी की भागीदारी ने एक अधिक समावेशी, जागरूक और सहयोगी सामुदायिक ढांचे के निर्माण के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाया।
कॉन्क्लेव में असिस्टेड लिविंग क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें श्री जयशंकर नटराजन (निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर), सुश्री नीना वाघ (संस्थापक निदेशक – एएलएफ़ओसी), सुश्री मुग्धा कालरा (पत्रकार एवं पीएचडी शोधार्थी – असिस्टेड लिविंग), सुश्री सीमा चड्ढा (मुस्कान पीएईपीआईडी), सुश्री संगीता जैन (संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी – एक्या असिस्टेड लिविंग), कर्नल उपदेश (पीएसीटी असिस्टेड लिविंग), सुश्री कविता बेनीवाल (समर्थ असिस्टेड लिविंग), और श्री जितेंद्र पी.एस. सोलंकी (आरआईए, एस्टेट प्लानर एवं विशेष आवश्यकता योजनाकार) सहित अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे, जो इस क्षेत्र को आकार दे रहे हैं।
विशेषज्ञों, कार्यकर्ताओं और परिवारों को एक साथ लाते हुए, यह कॉन्क्लेव भारत में आवासीय देखभाल के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक सहयोगात्मक मंच बना। चर्चा के दौरान, श्री जयशंकर नटराजन, निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (आईएसी) ने कोलकाता में आईएसी की आगामी आवासीय पहल ‘सामावेश’ का परिचय दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जब बात ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए आजीवन देखभाल की योजना बनाने की आती है। जैसे-जैसे जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, भविष्य के लिए तैयार मजबूत आवासीय तंत्र बनाने की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो जाती है। असिस्टेड लिविंग को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि हर जीवन चरण में गरिमा, स्वतंत्रता और निरंतर देखभाल सुनिश्चित हो सके। ‘सामावेश’ के माध्यम से, हमारा लक्ष्य एक समग्र और टिकाऊ मॉडल तैयार करना है, जो व्यक्तियों को सशक्त बनाए और परिवारों को दीर्घकालिक आश्वासन एवं सहयोग प्रदान करे।”
कॉन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण सुश्री मुग्धा कालरा द्वारा संचालित पैनल चर्चा थी, जिसमें क्षेत्र के नेताओं ने असिस्टेड लिविंग के संचालनात्मक और भावनात्मक पहलुओं पर व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
प्रथम नेशनल एएलएफ़ओसी (असिस्टेड लिविंग फैसिलिटी ऑर्गनाइजेशन्स कंसोर्टियम) कॉन्क्लेव २०२६ के बारे में, सुश्री नीना वाघ, संस्थापक निदेशक, एएलएफ़ओसी ने कहा, “भारत में असिस्टेड लिविंग को लेकर संवाद लगातार गति पकड़ रहा है, फिर भी कई परिवारों के लिए यह यात्रा अभी भी अनिश्चित और बिखरी हुई प्रतीत होती है। वे केवल देखभाल नहीं, बल्कि आश्वासन चाहते हैं ऐसे स्थान जहाँ उनके प्रियजन गरिमा और अपनापन के साथ जीवन जी सकें। साथ ही, इस तंत्र को स्पष्ट मानकों, साझा दिशानिर्देशों और निरंतर सहयोग के माध्यम से विकसित करने की आवश्यकता है। एएलएफ़ओसी जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं संवाद को बढ़ावा देकर, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करके, और एक अधिक संवेदनशील तथा सहयोगात्मक देखभाल व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़कर।”
क्षेत्र के नेताओं के साथ सक्रिय सहभागिता और ‘सामावेश’ के माध्यम से अपनी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए, आईएसी विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों के लिए एक अधिक संरचित, सहयोगात्मक और भविष्य-उन्मुख असिस्टेड लिविंग तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है।


