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भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में जुलाई 2025 तक मध्य प्रदेश का कुल एयूएम 1.17 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
इंदौर : भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की यात्रा पर नजर डालें तो यह स्पष्ट है कि हमने अपने लक्ष्यों की ओर उल्लेखनीय प्रगति की है। मई 2008 में 5.89 लाख करोड़ रुपये के एयूएम से बढ़कर अगस्त 2025 में यह 76.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। घरेलू बचत में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी भी बढ़कर वित्त वर्ष 21 के 7.6% से वित्त वर्ष 23 में 8.4% हो गई है, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
पीडब्ल्यूसी के अनुमान के अनुसार, 2047 तक म्यूचुअल फंड उद्योग में 26 करोड़ से अधिक अद्वितीय निवेशक हो सकते हैं (वर्तमान में 5.59 करोड़ यूनिक पैन धारकों से तुलना करें), और एयूएम लगभग 33 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। इस विकास से भारत का एयूएम-टू-जीडीपी अनुपात वर्तमान 19% से बढ़कर 2047 तक 110% से अधिक हो सकता है—इससे भारत विश्व की बड़ी निवेश शक्तियों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा। जैसे-जैसे भारत 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, म्यूचुअल फंड उद्योग को सिर्फ विकास का लाभार्थी न रहकर इसके सक्रिय उत्प्रेरक की भूमिका निभानी होगी।
अभिषेक तिवारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पीजीआईएम इंडिया एसेट मैनेजमेंट कंपनी कहते हैं, “ भारत का म्यूचुअल फंड प्रवेश (AUM-to-GDP अनुपात) वर्तमान में 18.2% है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका (131.7%) और कनाडा (90.5%) की तुलना में काफी कम है। यह दर्शाता है कि भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग अभी शुरुआती चरण में है और इसमें भारी वृद्धि की संभावना है। बाजार की परिपक्वता और घरेलू बचत के गहन वित्तीयकरण से यह विकास और मजबूत होगा। मार्च 2022 तक एयूएम (AUM) के मामले में इंदौर देश के शीर्ष 16 शहरों में शामिल था। जुलाई 2025 तक मध्य प्रदेश का कुल एयूएम 1.17 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 86% इक्विटी और 14% डेट में है। जून 2025 तक इंदौर शहर का एयूएम 32,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इंदौर में एआरएन/म्यूचुअल फंड वितरकों की संख्या: 1,944। (डेटा स्रोत: एएमएफआई)”
पिछले दशक की उपलब्धियां इस संभावना को और पुष्ट करती हैं। अगस्त 2025 तक मासिक एसआईपी प्रवाह 3,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 28,265 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। बी 30 शहरों का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां उनका एयूएम योगदान 9% से बढ़कर लगभग 19% हो गया है, जो वास्तविक आंकड़ों में करीब 9.5 गुना वृद्धि है।
डिजिटल परिवर्तन ने पहुंच को क्रांतिकारी रूप से बदल दिया है। अब 60% लेन-देन, जो कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 21% है, डिजिटल माध्यमों से होता है—जबकि वित्त वर्ष 2013 में यह केवल 45% लेन-देन और 1% मूल्य था।
(स्रोत: एएमएफआई विकसित भारत @2047)


