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जल संरक्षण पर डॉ. ए.के. द्विवेदी के सुझावों की मंत्री तुलसी सिलावट ने की सराहना, अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के दिए निर्देश
मंत्री बोले— “यह सुझाव अगली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा है, प्रदेश एवं देश के लिए अत्यंत लाभकारी पहल है”; प्रमुख सचिव को सकारात्मक अनुशंसा भेजने के दिए निर्देश
इंदौर 16 जुलाई। मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा जल संरक्षण एवं जन-जागरूकता को लेकर प्रस्तुत सुझावों की मुक्त कंठ से सराहना की। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि “आपका यह सुझाव अगली पीढ़ी के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा प्रदेश और देश दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
डॉ. द्विवेदी ने मंत्री श्री सिलावट से भेंट कर प्रदेश के समस्त शासकीय एवं निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में प्रतिवर्ष “जल ही जीवन है” विषय पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाने का प्रस्ताव सौंपा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (CPGRAMS) के माध्यम से भी सुझाव प्रेषित किए गए थे, जिन पर संज्ञान लेते हुए जल संसाधन विभाग, इंदौर द्वारा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र जारी किया जा चुका है।
भेंट के दौरान मंत्री श्री तुलसी सिलावट ने डॉ. द्विवेदी द्वारा समाजहित में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रस्ताव को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेते हुए प्रमुख सचिव, जल संसाधन विभाग को आवश्यक अनुशंसा शीघ्र प्रेषित की जाए, ताकि इस महत्वपूर्ण विषय पर त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।
डॉ. द्विवेदी ने अपने प्रस्ताव में प्रत्येक शिक्षण संस्थान को “वॉटर कंजर्वेशन कैंपस” के रूप में विकसित करने, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल संवर्धन को व्यवहारिक रूप से लागू करने, विद्यार्थियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाने तथा निबंध, भाषण, वाद-विवाद, पोस्टर, चित्रकला, स्लोगन प्रतियोगिताओं एवं जन-जागरूकता रैलियों के माध्यम से जल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने का सुझाव दिया है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि यदि विद्यालय / कॉलेज एवं समस्त विश्व विद्यालय स्तर से ही बच्चों एवं युवाओं में जल संरक्षण के संस्कार विकसित किए जाएँ, तो आने वाली पीढ़ियाँ जल संकट से बच सकेंगी और मध्यप्रदेश इस दिशा में पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है।


