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हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता, मस्तिष्क के संकेतों को समझना है जरूरी -डॉ. रजनीश कछारा
इंदौर,25 जून 2026 । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिरदर्द, तनाव, भूलने की आदत, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अधिकांश लोग इन्हें व्यस्त दिनचर्या, काम के दबाव या उम्र बढ़ने का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार शरीर के यही साधारण दिखने वाले संकेत किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी की ओर इशारा कर रहे होते हैं। हाल ही में मनाए गए विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के विषय में चर्चा करते हुए डॉ. रजनीश कछारा डायरेक्टर इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोसाइंसेज़ मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, इंदौर ने कहा कि ब्रेन ट्यूमर के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि समय पर पहचान होने पर उपचार के परिणाम बेहतर हो सकते हैं और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
डॉ. कछारा ने बताया कि मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केंद्र है। हम कैसे सोचते हैं, बोलते हैं, चलते हैं, देखते हैं, सुनते हैं और निर्णय लेते हैं, यह सब मस्तिष्क नियंत्रित करता है। जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि होने लगती है तो उसे ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। यह ट्यूमर कैंसरयुक्त भी हो सकता है और गैर-कैंसरयुक्त भी, लेकिन दोनों ही स्थितियों में यह मस्तिष्क के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकता है। ब्रेन ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं। कई मरीज महीनों तक सिरदर्द की दवा लेते रहते हैं। कुछ लोग इसे माइग्रेन समझते हैं, तो कुछ इसे तनाव का परिणाम मान लेते हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक कई बार ट्यूमर का आकार बढ़ चुका होता है। इसलिए शरीर द्वारा दिए जा रहे संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
डॉ. कछारा के अनुसार लगातार या बढ़ता हुआ सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय अधिक दर्द होना, बिना कारण उल्टी होना, बार-बार चक्कर आना, अचानक दौरे पड़ना, आंखों की रोशनी कम होना, दो-दो दिखाई देना, बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना, संतुलन बिगड़ना तथा व्यवहार और व्यक्तित्व में अचानक परिवर्तन जैसे लक्षण ब्रेन ट्यूमर के संकेत हो सकते हैं। कई मरीजों में भूलने की समस्या भी शुरुआती लक्षण के रूप में सामने आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याददाश्त की समस्या लगातार बढ़ रही हो और उसके साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी मौजूद हों तो चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि ब्रेन ट्यूमर किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है। नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक कोई भी इससे प्रभावित हो सकता है। बच्चों में बार-बार उल्टी होना, पढ़ाई में ध्यान न लगना, सिरदर्द, चलने में असंतुलन या सिर का आकार असामान्य रूप से बढ़ना संकेत हो सकते हैं। युवाओं में लगातार सिरदर्द, दृष्टि संबंधी समस्याएं या दौरे पड़ना महत्वपूर्ण चेतावनी हो सकते हैं। वहीं बुजुर्गों में स्मरण शक्ति की कमी, व्यक्तित्व में बदलाव और शारीरिक कमजोरी के रूप में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
विश्व स्तर पर भी ब्रेन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (GLOBOCAN 2022) के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र कैंसर के लगभग 3.22 लाख नए मामले दर्ज किए गए, जबकि लगभग 2.48 लाख लोगों की मृत्यु इस बीमारी के कारण हुई। यह आंकड़े बताते हैं कि संख्या अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद यह बीमारी गंभीर स्वास्थ्य बोझ उत्पन्न करती है।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. संजय गीद, मेडिकल डायरेक्टर ने कहा कि – पिछले एक दशक में न्यूरोसर्जरी और न्यूरो-ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर में अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, न्यूरोनेविगेशन सिस्टम, माइक्रोस्कोपिक सर्जरी, एंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी, इंट्रा-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग और उन्नत रेडियोथेरेपी जैसी तकनीकों के कारण ट्यूमर का अधिक सटीक निदान और सुरक्षित उपचार हो रहा है। कई ऐसे मरीज जो पहले असाध्य माने जाते थे, आज सफल उपचार के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं।
डॉ. कछारा ने परिवारों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। कई बार मरीज स्वयं अपने व्यवहार या स्मृति में हो रहे परिवर्तनों को नहीं पहचान पाता, लेकिन परिवार के सदस्य इन बदलावों को जल्दी नोटिस कर सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के स्वभाव में अचानक बदलाव आ रहा हो, वह सामान्य बातचीत भूलने लगा हो, रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई महसूस कर रहा हो या बार-बार एक ही बात दोहरा रहा हो, तो इसे केवल तनाव या उम्र का असर मानकर टालना नहीं चाहिए।
विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस का उद्देश्य केवल बीमारी के बारे में जानकारी देना नहीं है, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को यह संदेश देना भी है कि समय पर चिकित्सा सहायता लेने से परिणामों में बड़ा अंतर आ सकता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मस्तिष्क हमारे अस्तित्व का केंद्र है और इसकी सेहत के प्रति जागरूक रहना उतना ही जरूरी है जितना हृदय, फेफड़ों या अन्य अंगों की देखभाल करना।
“मस्तिष्क की हर चेतावनी को सुनिए, क्योंकि समय पर लिया गया निर्णय जीवन बचा सकता है।”


