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पितृ संतुष्टि का विशेष दिन सर्व पितृ अमावस्या: आचार्य शर्मा
इंदौर. सर्वपितृ अमावस्या पितृ संतुष्टि का विशेष दिन है. ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त इस दिन श्राद्ध अवश्य करना चाहिए. पितरों की संतुष्टि के लिए सभी श्राद्ध कर सकते है.
यह बात भारद्वाज ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान के शोध निदेशक आचार्य पं.रामचन्द्र शर्मा वैदिक ने कही. आचार्य शर्मा ने चर्चा में बताया कि पितृ पक्ष में पितर आशा लेकर पितृलोक से मनुष्य लोक में आते है और यह देखते है कि हमारे परिजन पुण्यतिथि पर श्राद्ध कर्म करते है अथवा नहीं.
ऐसा वे सर्वपितृ अमावस्या को सूर्यास्त पर्यंत देखते है. जो सूर्यास्त तक भी अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान, पुण्य आदि करते है, पितर उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर पुन: पितृ लोक को लौट जाते है. जो श्राध्द आदि कर्म नहीं करते वे श्राप देकर लौट जाते हैं. अत: ज्ञात-अज्ञात पितरों के निमित्त सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध कर्म अवश्य करें.
आचार्य शमा ने बताया कि आश्विन कृष्ण अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस दिन पितरों का विसर्जन होता है. अत: इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता. यह श्राद्ध पक्ष की महत्वपूर्ण तिथि कही जाती है. जो अपने दिवंगत परिजनों के निमित्त पितृ पक्ष में श्राद्ध व तर्पण आदि नहीं कर सकें अथवा जिन्हें अपने पितरों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं हो वे पितृ कृपा हेतु सर्व पितृ अमावस्या को सूर्यास्त तक श्राद्ध-तर्पण आदि कर सकते है.
आज के दिन सभी पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है व विसर्जन भी. अमावस्या को अंतिम बार पितृ गण अपने प्रिय जनों के यहा द्वार पर पिंडदान ,जलांजलि आदि के लिए आते हैं. यदि उन्हें श्राद्ध भोजनादि प्राप्त नहीं होता है तो वे शाप देकर पितृलोक को लौट जाते है. अत: श्राद्ध पक्ष में अपने जाने अनजाने पितरों के निमित्त अमावस्या को श्राद्ध अवश्य करें. यह दान-पुण्य का भी दिन माना जाता है. आज के दिन सूर्य व चन्द्रमा दोनों एक सीध में रहते है.


