- अब बिना ऑपरेशन भी हटेगी ब्रेस्ट की गांठ, इंदौर में शुरू हुई नई तकनीक
- जियो स्टूडियोज़ और सिख्या एंटरटेनमेंट की फिल्म 'डोरोथी' का टाइटल आउट, TIFF प्रीमियर से पहले बड़ा सरप्राइज
- सन नियो लेकर आ रहा है 'राजनंदिनी' : बदला, प्यार और रहस्यों से भरी एक नई कहानी
- Sun Neo Announces Raajnanndini: A Powerful Story of Revenge and Love
- दिल धोखा और डिज़ायर से लेकर लॉक अप सीज़न 2 तक… आकांक्षा चमोला का धमाकेदार सफर
विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेष: समग्र स्वास्थ्य की ओर भारत का कदम : होम्योपैथी की बढ़ती भूमिका
✍️ डॉ. ए. के. द्विवेदी
सदस्य, वैज्ञानिक सलाहकार मंडल, केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली
प्रोफेसर, एस. के. आर. पी. गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, इंदौर
इंदौर। प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि स्वस्थ जीवन ही समृद्ध समाज की आधारशिला है। आज जब जीवनशैली जनित रोग, मानसिक तनाव एवं प्रतिरक्षा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे समय में समग्र एवं सुरक्षित चिकित्सा पद्धतियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति एक प्रभावी एवं जनोपयोगी विकल्प के रूप में उभर रही है।
समग्र स्वास्थ्य की दिशा में होम्योपैथी का दृष्टिकोण
होम्योपैथी “Similia Similibus Curentur” के सिद्धांत पर आधारित एक ऐसी चिकित्सा प्रणाली है, जो रोग के लक्षणों के साथ-साथ रोगी के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर उपचार करती है। यह पद्धति न केवल रोगों के उपचार में सहायक है, बल्कि स्वास्थ्य के संरक्षण एवं संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैंसर में पैलिएटिव केयर : जीवन की गुणवत्ता में सुधार
कैंसर जैसे गंभीर रोगों में जहाँ पूर्ण उपचार संभव नहीं होता, वहाँ पैलिएटिव केयर का उद्देश्य रोगी के जीवन को अधिक सहज एवं गरिमापूर्ण बनाना होता है। होम्योपैथी इस क्षेत्र में सहायक भूमिका निभाते हुए दर्द, कमजोरी, अनिद्रा, चिंता एवं कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में योगदान देती है। यह रोगी के मानसिक संतुलन एवं आत्मबल को बढ़ाकर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाती है।
ऑटोइम्यून रोगों में संतुलित उपचार की दिशा
ऑटोइम्यून बीमारियाँ, जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, सोरायसिस एवं ल्यूपस, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। होम्योपैथी इन रोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित करने का प्रयास करती है। व्यक्तिगत लक्षणों पर आधारित उपचार से सूजन, दर्द एवं रोग की तीव्रता में कमी लाने में सहायता मिलती है, जिससे रोगी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार संभव होता है।
रोकथाम एवं पुनरावृत्ति नियंत्रण में प्रभावी भूमिका
बार-बार होने वाले संक्रमण, एलर्जी एवं सर्दी-खाँसी जैसी समस्याएँ आम जनजीवन को प्रभावित करती हैं। होम्योपैथी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ कर इन रोगों की पुनरावृत्ति को कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। विशेष रूप से बच्चों एवं कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों में यह पद्धति दीर्घकालिक लाभ प्रदान करती है।
अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य में योगदान
केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद (CCRH) द्वारा विभिन्न रोगों पर निरंतर शोध एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। एनीमिया, अस्थमा एवं त्वचा रोगों पर किए गए अध्ययन यह दर्शाते हैं कि होम्योपैथी साक्ष्य आधारित चिकित्सा के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
निष्कर्ष : स्वस्थ भारत के निर्माण में समग्र चिकित्सा की आवश्यकता
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम स्वास्थ्य के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाएं। होम्योपैथी न केवल एक सुरक्षित एवं किफायती चिकित्सा पद्धति है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य को संतुलित करने में सक्षम है।
आज का समय मांग करता है कि पारंपरिक एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से एक सशक्त स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की जाए, जिससे “स्वस्थ भारत – सशक्त भारत” का लक्ष्य साकार हो सके।


