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वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने पैराग्वे में व्यवसाय, संस्कृति, भाषा और प्रौद्योगिकी पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
पैराग्वे/सीहोर, वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने पैराग्वे के Ñeembucú स्थित यूनिवर्सिडाड नैशनल डी पिलार (पिलार राष्ट्रीय विश्वविद्यालय) के सहयोग से “व्यवसाय, संस्कृति, भाषा और प्रौद्योगिकी के अंतर्संबंध: वैश्विक संचार और नवाचार में परिवर्तन” (ICBCLT-2026) विषय पर तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन पैराग्वे के पिलार में किया।
चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, उद्यमियों, व्यावसायिक जगत के प्रतिनिधियों और पेशेवरों ने भाग लिया। सम्मेलन ने विभिन्न विषयों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, शोध कार्यों के प्रस्तुतिकरण, अंतरराष्ट्रीय संपर्क और सांस्कृतिक सहभागिता के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
सम्मेलन की शुरुआत पिलर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुई, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रथम दिन पिलर और उसके आसपास के ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण स्थलों का शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण भी आयोजित किया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समझने तथा अकादमिक और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर मिला।
सम्मेलन के दूसरे दिन व्यापक पोस्टर प्रस्तुति कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने तथा विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला। पैराग्वे, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के शोधार्थियों तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा लगभग 45 शोध प्रस्तुतियां प्रस्तुत की गईं। इस दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नवीन शोध पर विचार-विमर्श किया और अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन का तीसरा दिन अकादमिक दृष्टि से प्रमुख रहा, जिसमें औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। समारोह को पिलर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. डॉ. विक्टर रियोस ओहेदा, विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं डीन सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने संबोधित किया। पिलर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की सम्मेलन संयोजक ग्रासिएला बारियोस तथा वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के सम्मेलन संयोजक डॉ. विनोद भट्ट और डॉ. देव ब्रत गुप्ता ने भी सभा को संबोधित किया।
वक्ताओं ने तेजी से बदलती और आपस में जुड़ती दुनिया में अंतर्विषयक शोध और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में व्यवसाय, संस्कृति, भाषा और प्रौद्योगिकी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। चर्चाओं में नवाचार को बढ़ावा देने, मजबूत शोध वातावरण विकसित करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने और सार्थक ज्ञान के आदान-प्रदान में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया गया।
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण नौ विशेष व्याख्यान रहे, जिन्हें विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने संबोधित किया। इनमें अर्जेंटीना के प्रो. इंजीनियर हेक्टर रूबेन पाज़, अमेरिका के विस्कॉन्सिन स्थित डॉजविल के पूर्व महापौर जेम्स मैककॉली, पैराग्वे के उद्यमी एवं नेतृत्व विकास वक्ता सैमुअल विएन्स, वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के डॉ. विनोद भट्ट एवं डॉ. देव ब्रत गुप्ता, पैराग्वे के लुइस एडोल्फो चामोरो, डॉ. जुआन रामोन बुएनो जारा, कनाडा के व्यवसाय एवं निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञ अशोक कुमार सेलैया तथा बोस्टन के डॉ. एड्रियन धाना शामिल रहे।
विशेष व्याख्यानों के साथ सम्मेलन में 45 ऑफलाइन और 60 ऑनलाइन शोध प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न अकादमिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि से जुड़े शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों को अपने शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने तथा विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।
सम्मेलन के अंतिम दिन समापन एवं विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद पैराग्वे की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाली सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने सम्मेलन में सांस्कृतिक विविधता और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भावना को और मजबूत किया तथा प्रतिभागियों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर प्रदान किया।
सम्मेलन का समापन प्रेस वार्ता के साथ हुआ, जिसमें ICBCLT-2026 के प्रमुख परिणामों, भारत–पैराग्वे के बीच अकादमिक सहयोग तथा शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर चर्चा की गई।
ICBCLT-2026 ने वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय और पिलर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक सहयोग, शोध के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को और मजबूत किया तथा दोनों देशों के शिक्षण संस्थानों के बीच भविष्य में नए सहयोग की संभावनाओं को बढ़ावा दिया।


