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सफलता के लिए खुद ही बनाना पड़ती है राह: संत हरिराम
इंदौर. गलतियां, विफलता, अपमान, निराशा और अस्वीकृति ये सभी उन्नति और विकास का ही एक हिससा है. कोई भी व्यक्ति इन सभी पांचों चीजों का सामना किए बिना जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता.
ये विचार रामद्वारा छत्रीबाग में सात दिवसीय सत्संग में शुक्रवार को जोधपुर से आए संत हरिराम शास्त्री ने सभी भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए. उन्होंने आगे अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को किसी कार्य में लाभ प्राप्त करने के लिए आपको खुद ही प्रयास करने होंगे. जीवन में यदि आगे बढऩा है तो मनुष्य को खुद ही अपनी राह बनाना पड़ती है. लाभ देने के लिए कोई किसी को आमंत्रित नहीं करता है. मनुष्य अपना भाग्य का स्वंय विधाता है. जीवन में गलतियां स्वीकार करने की हिम्मत और उसे सुधार करने की क्षमता जिस व्यक्ति में होती है.
वह इंसान बहुत कुछ सीख सकता है। हमें हमारे कार्यों से कितने लोग पहचानते हैं उसका महत्व नहीं है. मगर क्यों पहचानते हैं इसका महत्व है. इसके पश्चात जोधपुर से आए संत हरिराम शास्त्री ने रामचरण महाप्रभु के जीवन पर भी प्रकाश डाला.
रामद्वारा छत्रीबाग से जुड़े रामसहाय विजयवर्गीय ने जानकारी देते हुए बताया कि रामद्वारा में यह सात दिवसीय सत्संग 4 जुलाई से 10 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें संत गोपालरामजी (ब्यावर वाले), मनसुखरामजी (सिरोही वाले), सनमुखरामजी (जोधपुर वाले) अपनी वाणी से सभी भक्तों को प्रवचनों की अमृत वर्षा करेंगे.


