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कनेक्टिव टिश्यू डिसीज़ जागरूकता ही निदान की पहली सीढ़ी
इंदौर. कनेक्टिव टिश्यू डिसीज के बारे में जागरूकता लाने के उद्देश्य से 8 जुलाई रविवार को ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में एक नेशनल लेवल कॉन्फ्रेंस होने जा रही है. इसमें भाग लेने के लिए 300 से अधिक डॉक्टर्स आएंगे. कनेक्टिव टिश्यू डिसीज पर होने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस है, जिसमें ना सिर्फ इसके लक्षणों पर चर्चा होगी बल्कि डॉक्टर्स को स्टेम सेल और बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट जैसी नवीनतम इलाज पद्धतियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
यह जानकारी देते हुए कॉन्फ्रेंस के सेक्रेटरी रिह्यूमेटोलॉजिस्ट डॉ. आशीष बाड़ीका ने बताया कि कनेक्टिव टिश्यू डिसीज पहली बार सुनने में नाम भले ही किसी अनजानी-सी बीमारी का लगता है पर इसके लक्षण बेहद सामान्य है. जैसे जोड़ों में दर्द, सूजन और जकडऩ, मुँह में बार-बार छाले होना, बाल झडऩा या त्वचा पर विभिन्न प्रकार के चकत्ते होना, बिना कारण बुखार और गठिया. पहली बार में तो हम इन लक्षणों को संक्रमण या आम जोड़ों का दर्द मान लेते हैं. डॉक्टर्स भी सामान्य बीमारी मानकर ही इसका इलाज करते रहते हैं और जब तक समझ आता है कि यह कोई आम समस्या नहीं बल्कि कनेक्टिव टिश्यू डिसीज है तब तक यह बीमारी आँखों, किडनी, लिवर, फेफड़ें और मस्तिष्क सहित शरीर के अन्य कई जरुरी अंदरूनी अंगों को भी अपनी चपेट में ले चुकी होती हैं.
होती है कई बीमारियां
डॉ. बाड़ीका ने बताया कि कनेक्टिव टिश्यू डिसीज के अंतर्गत कई तरह की बीमारियां होती है. इनमे लुपस, स्क्लिरोडर्मा, रहूमटॉइड आर्थराइटिस, म्योसिटिस, वास्कोलाइटिस वगैरह आम है।आमतौर पर माना जाता है कि यह बीमारियां दुर्लभ है और कुछ ही लोगों को होती है जबकि सच्चाई यह है कि कनेक्टिव टिश्यू डिसीज बहुत आम है बस सही समय पर इसकी पहचान नही हो पाती है. खास बात यह है कि इन सभी बीमारियों में जोड़ों में दर्द या त्वचा में विभिन्न प्रकार के चकत्ते जैसे बाहरी लक्षण दिखाई देते हैं, जिसे आमतौर पर डॉक्टर और मरीज दोनों ही गम्भीरतापूर्वक नहीं लेते जबकि ये सभी बीमारियां बेहद गंभीर है और शरीर के जरुरी अंदरूनी अंगों को धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त करती जाती है. सही समय पर इनकी पहचान होने पर ही सही इलाज मिलना संभव होता है. इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य इन्ही बीमारियों के प्रति जागरूकता लाना और इनकी नविन चिकित्सा विधियों के बारे में डॉक्टर्स को जानकारी देना है.


