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माँ पर सुनाए किस्से, कहानियाँ और कविताएं
क्रिएट स्टोरीज ने मनाया मदर्स डे
इंदौर. मदर्स डे के मौके पर किस्सागोई परियों की कार्यक्रम का आयोजन क्रिएट स्टोरीज द्वारा किया गया. इसमें सभी में अपनी माँ पर किस्से कविता सुनाए.
संचालक दीपक शर्मा ने बताया इस कार्यक्रम में हर उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया कुछ अपनी ‘माँÓ के साथ आये थे, कुछ माँ के दिए संस्कारों के बारे में बता रहे थे. पोएट्री सुना रहे थे. क्रिएट स्टोरीज के कुछ बच्चे सान्या, साक्षी, रितेश, दिव्यांशी, दर्शिता ने छोटी सी आशा, आ लेके चलू तुझको ऐसे देश में- मिलती है जहाँ खुशियाँ परियों के भेष में, गाने पर डांस किया.
पद्मश्री डॉ. जनक पलटा ने बताया कि आज भी मैं अपनी माँ के आदर्शों पर ही चलती हूँ. हमेशा जो उन्होंने संस्कार दिए वो आज मेरे अंदर हैं और उन्होंने जो भी कहा मैंने सब माना और आज भी उसी राह पर चलती हूँ. उन्होंने बहुत विश्वास किया बच्चों पर. वे हमारे लिए किसी परी से कम नहीं थी, वो मुझे जो चि_ियां लिखती थी आज भी मेरे पास है क्योंकि उस समय फ़ोन नहीं होते थे. मेरे पास तकऱीबन 100 साल पुरानी दरी आज भी है जो मेरी माँ ने बनाई थी, माँ के किस्से कभी ख़त्म नहीं हो सकते, मुझे गर्व है की मेरे अंदर उनके संस्कार है. मैं आज के समय की बात करूं तो ये जो तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो ये अब सिर्फ फ़ोन पर है. मेरा कहना है की इन सबसे निकलो और कम से कम माँ को देखने का तो वक्त निकाले और माँ भी बच्चों के साथ आमने सामने समय बिताये सिर्फ मदर्स डे पर उन्हें ये मत बताओ की वो तुम्हारी माँ है.
सीख हमेशा होती है साथ
फिटनेस फ्रीक आरती महेश्वरी ने कहा कि माँ की एक दुआ जि़न्दगी बना देती है , माँ खुद रोती है मगर हमे हंसा देती है, हमें कभी भी माँ को नहीं रुलाना चाहिए और हमेशा उनकी रेस्पेक्ट करना और ख्याल रखना चाहिए, हमने इंसान बनाने वाली और अच्छे संस्कार देने वाली हमारी माँ है. लेखिका ज्योति जैन ने बताया की जब मैं सिर्फ बेटी थी तब कई बार मेरी माँ का अनुशासन आक्रोश पैदा कर देता था क्योंकि माँ कहीं जाना, देर तक घूमना, टूर या पिकनिक पर जाने का मना करती थ. तब बहुत बुरा लगता था और ऐसी चीज़े माँ के प्रति आक्रोश पैदा करती थी लेकिन जब मेरी खुद की बेटी हुई, मेरी 2 बेटियां है तब मुझे समझ आया हम माँ को कितना गलत समझते हैं, लेकिन ये जो बंदिशें होती है वो हमारी चिंता होती है और ये सब हमे बाद में समझ आती है. माँ की सीख हमेशा साथ होती है.
मां ने बढ़ाया हौंसला
14 साल के कृष्णा काटे ने बताया कि मेरी माँ संध्या काटे मेरे एक्सीडेंट के 6 साल बाद मैराथन 2016 में हुई थी तब मैं अच्छे से भाग नहीं पाता था क्योंकि एक्सीडेंट में मेरा पैर कट गया था और नकली पैर से भागना मुश्किल था पर मेरी मम्मी ने हिम्मत दी की वो खुद मेरे को प्रोत्साहित करने के लिए मेरे साथ भागी बस उस दिन से ठान लिया था अब रुकुंगा नहीं. इस खास मौके पर प्रिंसिपल डॉ अपर्णा व्यास, अंजू शंकर खत्री, कविता सबरवाल आदि लोग मौजूद थे. पोएट डॉ. अजीत उपाध्याय ने माँ पर कविता सुनाई.


