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- हंसल मेहता की 'स्कैम 1992' से लेकर चिन्मय मांडलेकर की 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' तक: भारतीय सिनेमा के 5 निर्देशक जिन्होंने वित्त और अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर विषयों को पर्दे पर उतारा
हंसल मेहता की ‘स्कैम 1992’ से लेकर चिन्मय मांडलेकर की ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ तक: भारतीय सिनेमा के 5 निर्देशक जिन्होंने वित्त और अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर विषयों को पर्दे पर उतारा
मनोरंजन की दुनिया में ऐसी फिल्में और सीरीज़ बहुत कम देखने को मिलती हैं, जिनकी कहानी पूरी तरह वित्त, अर्थव्यवस्था, आर्थिक संकट या बड़े वित्तीय घोटालों जैसे गंभीर और वास्तविक विषयों पर आधारित हो। भारतीय सिनेमा के कुछ निर्देशकों ने इन जटिल मुद्दों को रोचक अंदाज़ में दर्शकों तक पहुंचाने का साहस किया है। आइए नज़र डालते हैं ऐसी ही कुछ उल्लेखनीय कृतियों पर।
स्कैम 1992 – हंसल मेहता
साल 2020 में निर्देशक हंसल मेहता ने स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी का निर्देशन किया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा। यह सीरीज़ हर्षद मेहता की साधारण जीवन से शेयर बाज़ार के बड़े नाम बनने तक की कहानी दिखाती है। उन्हें कभी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का ‘अमिताभ बच्चन’ कहा जाता था, लेकिन बाद में वित्तीय पत्रकार सुचेता दलाल ने उनके द्वारा किए गए देश के सबसे बड़े शेयर बाज़ार घोटाले का पर्दाफाश किया।
रेड – राज कुमार गुप्ता
निर्देशक राज कुमार गुप्ता ने वर्ष 2018 में अपराध-प्रधान थ्रिलर फिल्म रेड का निर्देशन किया। फिल्म में अजय देवगन ने एक ईमानदार और निडर आयकर अधिकारी की भूमिका निभाई, जो लखनऊ के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी शारदा प्रसाद पांडे के जीवन से प्रेरित थी। फिल्म की कहानी वर्ष 1981 में कांग्रेस विधायक सरदार इंदर सिंह के यहां हुई देश की सबसे चर्चित आयकर छापेमार कार्रवाइयों में से एक पर आधारित है।
गवर्नर: द साइलेंट सेवियर – चिन्मय मांडलेकर
इंस्पेक्टर जेंडे की सफलता के बाद निर्देशक चिन्मय मांडलेकर ने अभिनेता मनोज बाजपेयी के साथ गवर्नर: द साइलेंट सेवियर के लिए दोबारा काम किया। यह फिल्म 1990 के दशक में भारत के गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को सामने लाती है। फिल्म भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर एस. वेंकटरमणन के जीवन और उनके योगदान से प्रेरित है, जिन्होंने 1991 के ऐतिहासिक भुगतान संतुलन संकट के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
लकी भास्कर – वेंकी अटलूरी
निर्देशक वेंकी अटलूरी की लकी भास्कर एक काल्पनिक ब्लैक कॉमेडी और हीस्ट ड्रामा है। इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय बैंक कैशियर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अधिक कमाई की चाह में एक जोखिम भरी निवेश योजना का हिस्सा बन जाता है और धीरे-धीरे धन शोधन की जटिल दुनिया में फंसता चला जाता है।
स्कैम 2003 – तुषार हीरानंदानी
निर्देशक तुषार हीरानंदानी की स्कैम 2003: द तेलगी स्टोरी अब्दुल करीम तेलगी द्वारा किए गए चर्चित स्टांप पेपर घोटाले पर आधारित है। यह सीरीज़ पत्रकार संजय सिंह की पुस्तक तेलगी: ए रिपोर्टर्स डायरी से भी प्रेरित है। इसमें एक साधारण फल विक्रेता से लेकर देश के सबसे बड़े स्टांप पेपर घोटाले के मास्टरमाइंड बनने तक तेलगी के सफर को विस्तार से दिखाया गया है।
वित्तीय घोटालों से लेकर आर्थिक संकट तक, भारतीय सिनेमा के इन निर्देशकों ने ऐसे विषयों को बड़े पर्दे और ओटीटी पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के मनोरंजन में कम जगह मिलती है। यही वजह है कि ये फिल्में और सीरीज़ सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं, बल्कि देश के आर्थिक इतिहास के अहम अध्यायों से भी दर्शकों को रूबरू कराती हैं।


