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तकनीक के अनुरूप शिक्षकों को प्रशिक्षित किये जाने की आवश्यकता
फॉमेंसी पर तीन दिवीय नेशनल कांफ्रेंस
इन्दौर. इंदौर इंस्टीट्युट ऑफ फॉमेंसी में फार्मेसी पर नेशनल सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है. इसका मुख्य विषय है फार्मेसी शिक्षकों के समक्ष चुनौतियों विकल्प एवं सम्भावनाएं. इस कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए प्रदेश के कई शहरों के शिक्षक एवं फार्मेंसी के दिग्गज आए हैं.
तीन दिवसीय तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आईआईएसटी के सेमिनार हाल में शुभारंभ हुआ. फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के दुर्ग विश्वविघालय के कुलपति एवं उपाध्यक्ष फॉर्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया डॉ. शैलेन्द्र सराफ ने इस वर्ग का उद्घाटन किया. अन्य अतिथियों में प्रो. वी.के. दीक्षित हरिसिंह गौर विश्वविघालय सागर, डी.के. जैन निदेशक आयपीएस एकेडमी और संस्था के डायरेक्टर अरुण भटनागर उपस्थित थे.
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फार्मेसी शिक्षकों का ज्ञानवर्धन और उनमें वैश्विक स्तर की प्रतियोगितात्मक प्रदान करना है. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सर्राफ ने कहा कि समय के साथ तकनीक में बदलाव आ रहे हैं. मेडिकल डिवाइसेस भी नई-नई आ रही है. टीचिंग मेथड में भी तकनीक आ रही है. उसके अनुसार शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किये जाने की आवश्यकता है ताकि वे विद्यार्थियों को भविष्य के अनुरूप तैयार कर सकें. उन्होंने कहा कि जीडीपी में फार्मेसी का योगदान आई के बाद नंबर दो पर है. इसलिए फार्मेसी में अपार संभावनाएं है.
विशेषज्ञ साझा करेंगे विचार
इस मंच पर वरिष्ठ शिक्षकों एवं दवा उद्योग के विशेषज्ञ सम्मलित रुप से अपने-अपने विषयों पर अनुभव साझा करेंगे ताकि प्रशिक्षु शिक्षक छात्रों को फार्मो उघोगों की वर्तमान आवश्यकताए एवं भविष्य की चुनौतियो हेतु तैयार कर सकें. इस प्रषिक्षण वर्ग में मध्यप्रदेश के विभिन्न कॉलेजों से आए करीब 60 शिक्षक भाग ले रहे है. संचालन डॉ. महावीर छाजेड ने किया. संस्था के प्राचार्य डॉ. सजय जैन ने ने आभार माना


