- Netizens hail Varun Dhawan’s acting in Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai call it a ‘Paisa Vasool Entertainer'
- June Calls for a Laugh: The Best Comedy Titles to Stream on Netflix
- एका मोबिलिटी ने पुणे प्लांट से 1,000वें एससीवी को हरी झंडी दिखाई
- मोटोरोला ने लॉन्च किया edge 70 pro+, जो 2026 का सबसे स्टाइलिश फ्लैगशिप किलर स्मार्टफोन है
- जावेद जाफरी ने सरोज खान को दिया श्रेय, कहा उन्होंने सिखाया कि डांस में एक्सप्रेशन कितनी अहम है
निर्भय कलशयात्रा ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
देपालपुर में जारी भागवत कथा के पांचवें दिन जया किशोरी जी ने सुनाई कृष्ण की बाल लीलाएं
देपालपुर। नगर में दादा निर्भयसिंह पटेल की पुण्य स्मृति में जारी श्रीमद भागवत का मंगलवार को पांचवां दिन था। जया किशोरी जी के मुखारविंद से श्री कृष्ण की लीलाओं को सुनने प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित हो रहे हैं।
दादा निर्भयसिंह पटेल के जन्म जयंती के अवसर पर आयोजक क्षेत्रीय विधायक श्री मनोज पटेल का सम्मान किया गया। कार्यक्रम आरम्भ में निकली भव्य कलश यात्रा को आज वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड इंडिया के हेड श्री संतोष शुक्ला और उनकी टीम ने विधायक मनोजजी पटेल को प्रमाण पत्र देकर गौरवान्वित किया। उल्लेखनीय है कि कलश यात्रा में 75 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। जिनमें व्यास पीठ का पूजन श्री इंदर सिंह पटेल और परिवार ने किया।
पांचवें दिन मंगलवार को कृष्णजी की बाल लीलाओं को सुनकर हर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गया।
जया किशोरी ने कथा के दौरान बताया कि कृष्ण जी सर पर मोर पंख क्यों धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि कृष्णजी को स्वचछता पसंद है। मोर कभी संभोग नहीं करता। जब वह रोता है तो उसके आंसू पीकर मोरनी गर्भवती होती है। राधाजी भी नीले रंग की चुनरिया ओढ़ती हैं। इसलिए कान्हा जी मोर पंख मस्तक पर धारण करते है।
भागवत सुनने हजारों लोग पहुँच रहे हैं। पंडाल खचाखच भरा रहता है। व्यास पीठ का पूजन विधायक मनोज निर्भयसिंहजी पटेल ने किया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष गोपालसिंहजी चौधरी, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमनारायण जी पटेल, चन्दरसिंहजी जाधव, जिला महामंत्री गुमानसिंहजी पंवार, मंडल अध्यक्षगण भरत जी आंजना, कैलाशजी भाँगड़िया, सत्यनारायणजी पटेल, जालमसिंहजी सोलंकी, जितेंद्रजी रघुवंशी, आशारामजी सिसोदिया, भुवानसिंहजी पंवार, बहादुरसिंहजी डाबी, प्रेमसिंहजी ढाबली, दुलेसिंहजी राठौड़, सोहनजी पटेल, सत्यनारायणजी आजाद, देवकरणजी मौर्य, राजेशजी देथलीया मौजूद थे।


