- इंदौर पिंक पैंथर्स मध्य प्रदेश लीग (MPL) T20-2026 में चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ उतरने को तैयार; टीम ने अपनी सोच और तैयारियों का रोडमैप साझा किया
- द क्रश कॉफी पर अब होगा खास संडे ब्रन्च
- जल, जीवन और जमीन के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण आवश्यक : डॉ. ए.के. द्विवेदी
- Triptii Dimri Dives into Comedy with Maa Behen! A Full-Blown Comedy Caper Coming Up Next?
- The Rise of Ram Charan as Indian Cinema’s Complete Hero
निर्भय कलशयात्रा ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
देपालपुर में जारी भागवत कथा के पांचवें दिन जया किशोरी जी ने सुनाई कृष्ण की बाल लीलाएं
देपालपुर। नगर में दादा निर्भयसिंह पटेल की पुण्य स्मृति में जारी श्रीमद भागवत का मंगलवार को पांचवां दिन था। जया किशोरी जी के मुखारविंद से श्री कृष्ण की लीलाओं को सुनने प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित हो रहे हैं।
दादा निर्भयसिंह पटेल के जन्म जयंती के अवसर पर आयोजक क्षेत्रीय विधायक श्री मनोज पटेल का सम्मान किया गया। कार्यक्रम आरम्भ में निकली भव्य कलश यात्रा को आज वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड इंडिया के हेड श्री संतोष शुक्ला और उनकी टीम ने विधायक मनोजजी पटेल को प्रमाण पत्र देकर गौरवान्वित किया। उल्लेखनीय है कि कलश यात्रा में 75 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। जिनमें व्यास पीठ का पूजन श्री इंदर सिंह पटेल और परिवार ने किया।
पांचवें दिन मंगलवार को कृष्णजी की बाल लीलाओं को सुनकर हर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गया।
जया किशोरी ने कथा के दौरान बताया कि कृष्ण जी सर पर मोर पंख क्यों धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि कृष्णजी को स्वचछता पसंद है। मोर कभी संभोग नहीं करता। जब वह रोता है तो उसके आंसू पीकर मोरनी गर्भवती होती है। राधाजी भी नीले रंग की चुनरिया ओढ़ती हैं। इसलिए कान्हा जी मोर पंख मस्तक पर धारण करते है।
भागवत सुनने हजारों लोग पहुँच रहे हैं। पंडाल खचाखच भरा रहता है। व्यास पीठ का पूजन विधायक मनोज निर्भयसिंहजी पटेल ने किया। जिला पंचायत उपाध्यक्ष गोपालसिंहजी चौधरी, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रेमनारायण जी पटेल, चन्दरसिंहजी जाधव, जिला महामंत्री गुमानसिंहजी पंवार, मंडल अध्यक्षगण भरत जी आंजना, कैलाशजी भाँगड़िया, सत्यनारायणजी पटेल, जालमसिंहजी सोलंकी, जितेंद्रजी रघुवंशी, आशारामजी सिसोदिया, भुवानसिंहजी पंवार, बहादुरसिंहजी डाबी, प्रेमसिंहजी ढाबली, दुलेसिंहजी राठौड़, सोहनजी पटेल, सत्यनारायणजी आजाद, देवकरणजी मौर्य, राजेशजी देथलीया मौजूद थे।


