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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर युवाओं को मिला स्वास्थ्य का संदेश
इंदौर। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर डॉ. ए.के. द्विवेदी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (शरीर क्रिया विज्ञान), ने एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में बीएचएमएस विद्यार्थियों को विशेष व्याख्यान देकर रक्ताल्पता (एनीमिया) की रोकथाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि एनीमिया केवल एक रोग नहीं, बल्कि पोषण की कमी और असंतुलित जीवनशैली का परिणाम है
इसे सही खान-पान और जागरूकता से आसानी से रोका जा सकता है। उन्होंने गुड़-चना, खारक, पिंड खजूर, पालक, चीकू, चुकन्दर, सत्तू और आंवला कैंडी के नियमित सेवन के सकारात्मक प्रभावों को विस्तार से समझाया।
उन्होंने “Health, Disposition and Disease” के सिद्धांत को बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य, मानसिक प्रवृत्ति और रोग — ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और प्रारंभिक अवस्था में संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
कम उम्र में बढ़ता मोटापा — एक गंभीर चिंता
डॉ. द्विवेदी ने युवाओं में तेजी से बढ़ते मोटापे को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र में ही हार्ट अटैक जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इससे बचने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक संतुलन आवश्यक है।
पीसीओडी एवं हार्मोनल असंतुलन पर विशेष ध्यान
विशेष रूप से 18 से 26 वर्ष की युवतियों में बढ़ती PCOD (पीसीओडी), अनियमित माहवारी और हार्मोनल असंतुलन पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं को फिजियोलॉजिकल एवं प्राकृतिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है, जिसमें सही आहार, नियमित दिनचर्या और मानसिक संतुलन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मानसिक स्वास्थ्य और योग का महत्व
डॉ. द्विवेदी ने अनावश्यक क्रोध, चिड़चिड़ापन, मानसिक थकान, भूलने की आदत और अनिद्रा से बचने के लिए योग को अत्यंत प्रभावी बताया। उन्होंने विशेष रूप से शवासन करने की सलाह दी, जिससे मन और शरीर दोनों को संतुलन मिलता है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। यह व्याख्यान युवाओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ।


