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एआई, साइबर सिक्योरिटी और इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम्स की बढ़ती मांग के बीच छात्रों का रुझान ‘करियर-फर्स्ट एजुकेशन’ की ओर: मानव रचना
रोजगार, इंडस्ट्री इंटीग्रेशन, ग्लोबल एक्सपोज़र और फ्यूचर-रेडी करियर को प्राथमिकता देने वाले छात्रों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
फरीदाबाद: भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति तेजी से बदल रही है। अब छात्र पारंपरिक डिग्री विकल्पों के बजाय रोजगारपरक शिक्षा, इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और भविष्य के करियर अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी बदलती सोच के बीच मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में चल रही एडमिशन प्रक्रिया (MRNAT 2026) के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, साइकोलॉजी और इंटरडिसिप्लिनरी प्रोग्राम्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।
देशभर के 30 से अधिक केंद्रों पर आयोजित मानव रचना नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट (एमआरनैट 2026) के दौरान सामने आए आंकड़े बताते हैं कि छात्र अब करियर-ओरिएंटेड और इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड प्रोग्राम्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उत्तर, पूर्व, पश्चिम, मध्य, दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के साथ-साथ गुवाहाटी, रांची, सिलीगुड़ी, इंफाल, आइजोल, दीमापुर, दरभंगा और विजयवाड़ा जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रवेश प्रक्रिया में भाग लिया। यह उभरते करियर विकल्पों, टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा और बदलते शैक्षणिक विकल्पों को लेकर बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
इस वर्ष जिन पाठ्यक्रमों को सबसे अधिक पसंद किया जा रहा है, उनमें बी.टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विद AI & ML, गूगल क्लाउड के सहयोग से जनरेटिव AI, माइक्रोसॉफ्ट के साथ डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी एंड थ्रेट इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग प्रमुख हैं। इसके अलावा साइकोलॉजी और क्लिनिकल साइकोलॉजी, डिजाइन प्रोग्राम्स, बीबीए इन डेटा एनालिटिक्स एंड AI, फिनटेक, बिजनेस एनालिटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी, फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स तथा उद्यमिता आधारित प्रोग्राम्स में भी छात्रों की मजबूत रुचि देखने को मिल रही है।
इन पाठ्यक्रमों की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि छात्र अब अपने अकादमिक निर्णयों को बदलते जॉब मार्केट, तकनीकी बदलावों और वैश्विक इंडस्ट्री ट्रेंड्स के साथ जोड़कर देख रहे हैं। AI, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, ऑटोमेशन, डिजिटल बिजनेस और मेंटल हेल्थ स्टडीज़ जैसे क्षेत्र आज युवाओं के बीच सबसे आकर्षक करियर विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
उच्च शिक्षा में हो रहे इस बदलाव पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा, “आज के छात्र पहले की तुलना में कहीं अधिक स्पष्टता और जागरूकता के साथ अपने शिक्षा विकल्प चुन रहे हैं। वे रोजगार, ग्लोबल एक्सपोज़र, इनोवेशन, उद्यमिता और सार्थक करियर निर्माण को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करें, जो कक्षा की पढ़ाई को इंडस्ट्री की जरूरतों, उभरती तकनीकों और वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़े।”
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), गूगल क्लाउड (Google Cloud), एचसीएल गुवी (HCL GUVI), सी-डैक (CDAC), जेबिया (Xebia), डेलॉइट (Deloitte), सिस्को (Cisco), इंटेल (Intel), एलएंडटी एडुटेक (L&T EduTech), क्विक हील (Quick Heal), मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक (Mitsubishi Electric) और ट्रूचिप (Truechip) जैसी संस्थाओं के साथ मानव रचना की इंडस्ट्री साझेदारियां भी छात्रों के बढ़ते झुकाव का एक महत्वपूर्ण कारण बन रही हैं। ये सहयोग छात्रों को सर्टिफिकेशन, लाइव प्रोजेक्ट्स, नई तकनीकों और इंडस्ट्री एक्सपोज़र के साथ व्यावहारिक सीखने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।
इस वर्ष एक और महत्वपूर्ण बदलाव महिला छात्रों की बढ़ती भागीदारी के रूप में सामने आया है। AI, डेटा साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर-टेक, साइकोलॉजी और डिजाइन-टेक से जुड़े प्रोग्राम्स में छात्राओं की रुचि लगातार बढ़ रही है, जो तकनीक आधारित और इनोवेशन-ड्रिवन करियर की दिशा में पूरे देश में हो रहे बदलाव को दर्शाता है।
शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज़ (MRIIRS) के वाइस चांसलर डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा, “भविष्य की शिक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थान इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, रिसर्च ओरिएंटेशन, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग को छात्रों की शिक्षा यात्रा में कितनी प्रभावी तरह से शामिल करते हैं। आज के छात्र ऐसे शैक्षणिक माहौल की तलाश में हैं, जो उन्हें इनोवेशन, सहयोग, क्रिटिकल थिंकिंग और वास्तविक जीवन में सीख को लागू करने के लिए प्रेरित करे। इसलिए विश्वविद्यालयों को लगातार अपने लर्निंग इकोसिस्टम को विकसित करना होगा।”
अब छात्र और अभिभावक संस्थानों का चयन केवल पारंपरिक प्रतिष्ठा के आधार पर नहीं कर रहे, बल्कि प्लेसमेंट, इंडस्ट्री एक्सपोज़र, ग्लोबल अकादमिक अवसर, सर्टिफिकेशन, इंटर्नशिप और निवेश पर मिलने वाले लाभ (ROI) जैसे पहलुओं को भी गंभीरता से देख रहे हैं। यह छात्रों की बदलती सोच और करियर-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
इसी दिशा में छात्रों को सही उच्च शिक्षा विकल्प चुनने में मदद देने के उद्देश्य से मानव रचना 23 मई, शनिवार को कैंपस में “Admissions Expo 2026” का आयोजन कर रहा है। इस एक्सपो में छात्र और अभिभावक विभिन्न पाठ्यक्रमों, करियर विकल्पों, स्कॉलरशिप, साइकोमेट्रिक प्रोफाइलिंग और ग्लोबल अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
एडमिशन प्रक्रिया के दौरान छात्रों और अभिभावकों की बदलती अपेक्षाओं पर टिप्पणी करते हुए मानव रचना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) दीपेंद्र कुमार झा ने कहा, “आज के छात्र एडमिशन लेने से पहले कोर्स , स्पेशलाइजेशन और करियर विकल्पों को समझने में पहले से कहीं अधिक समय दे रहे हैं। वहीं अभिभावक भी संस्थान चुनते समय इंटर्नशिप, इंडस्ट्री एक्सपोज़र, ग्लोबल अवसर, लचीलापन और दीर्घकालिक करियर विकास जैसे पहलुओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। यह देशभर में उच्च शिक्षा को लेकर अधिक जागरूक और रिसर्च-आधारित सोच को दर्शाता है।”
केज बिजनेस स्कूल (KEDGE Business School), मोनाश यूनिवर्सिटी (Monash University), एचटीएमआई स्विट्जरलैंड (HTMi Switzerland) और नाबा इटली (NABA Italy) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मानव रचना की साझेदारियां छात्रों को वैश्विक स्तर के शैक्षणिक अवसर उपलब्ध करा रही हैं। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में मान्यता, नैक ए++ एक्रिडिटेशन (NAAC A++ Accreditation), लगातार दो वर्षों तक एनआईआरएफ टॉप 100 यूनिवर्सिटीज़ में स्थान, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती कैंपस हायरिंग और 110 से अधिक इनोवेशन एवं उद्यमिता वेंचर्स के समर्थन जैसी उपलब्धियां मानव रचना के इंडस्ट्री-अलाइंड शैक्षणिक इकोसिस्टम को और मजबूत बना रही हैं।


