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शीना चौहान ने बताया कैसे करती हैं इंटेंस रोल्स की तैयारी: “हर किरदार में अपना दिल और आत्मा झोंक देती हूं”
भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण किरदारों को पर्दे पर जीवंत करना किसी भी अभिनेता के लिए आसान नहीं होता। अभिनेत्री शीना चौहान का मानना है कि एक सशक्त और वास्तविक प्रदर्शन केवल संवाद याद करने से नहीं आता, बल्कि उसके लिए किरदार की भावनात्मक यात्रा को गहराई से समझना जरूरी होता है। यही वजह है कि वह हर भूमिका के लिए मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से खुद को पूरी तरह तैयार करती हैं।
अपने अभिनय के प्रति समर्पण के लिए जानी जाने वाली शीना बताती हैं कि जैसे ही वह किसी फिल्म के लिए हां कहती हैं, उसी पल से उस किरदार की दुनिया में खुद को ढालने की तैयारी शुरू कर देती हैं, ताकि वह निर्देशक की कल्पना और कहानी के साथ पूरा न्याय कर सकें।
उदाहरण के तौर पर, फिल्म ‘संत तुकाराम’ में अवली का किरदार निभाने के लिए उन्होंने गांवों में समय बिताया और वहां की महिलाओं के जीवन, संघर्ष और भावनाओं को करीब से समझा। वहीं अपनी आगामी साउथ फिल्म ‘JMD’ में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका के लिए उन्होंने एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ समय बिताया, ताकि उस पेशे की अनुशासन, दबाव और वास्तविकताओं को महसूस कर सकें। इसके अलावा, काजोल के साथ फिल्म ‘द ट्रायल’ में एक ईसाई युवती का किरदार निभाने के लिए उन्होंने बांद्रा के चर्चों में जाकर वहां के माहौल और लोगों को करीब से देखा और समझा।
अपने अभिनय के प्रति दृष्टिकोण साझा करते हुए शीना कहती हैं, “जिस क्षण मैं किसी फिल्म के लिए हां कहती हूं, उसी समय से मैं उस किरदार की तैयारी शुरू कर देती हूं। हर भूमिका की अपनी भावनात्मक गहराई, चुनौतियां और अनुभव होते हैं। मेरा मानना है कि यदि आप चाहते हैं कि दर्शक किसी किरदार से जुड़ें, तो आपको पहले उसे भीतर से समझना होगा। मैं हर किरदार को अपना पूरा दिल और आत्मा दे देती हूं, क्योंकि काम करने का यही मेरा तरीका है।”
एक्शन प्रधान फिल्मों के लिए उनकी तैयारी केवल भावनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहती। ऐसे प्रोजेक्ट्स में वह अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान देती हैं और खुद को शारीरिक रूप से भी उस भूमिका के अनुरूप ढालती हैं। साथ ही, वह अपनी एकाग्रता बनाए रखने के लिए बाहरी शोर-शराबे और अनावश्यक व्यस्तताओं से दूरी बना लेती हैं।
वह आगे कहती हैं, “जब मैं किसी गहन और भावनात्मक किरदार पर काम कर रही होती हूं, तो अक्सर सोशल मीडिया से दूरी बना लेती हूं और आसपास के अनावश्यक शोर से खुद को अलग कर लेती हूं। इससे मुझे पूरी तरह फोकस करने और भावनात्मक रूप से किरदार के लिए उपलब्ध रहने में मदद मिलती है। तैयारी केवल किरदार जैसा दिखने की नहीं होती, बल्कि उसकी भावनाओं को सच्चाई से महसूस करने की होती है, ताकि वह पर्दे पर स्वाभाविक रूप से दिखाई दे।”
शीना का मानना है कि भावनात्मक रूप से गहरे किरदार निभाना एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि ऐसे किरदारों के माध्यम से इंसानी अनुभवों को ईमानदारी के साथ दर्शकों तक पहुंचाना होता है।
वह कहती हैं, “हर फिल्म एक सामूहिक सपना होती है। एक अभिनेता के रूप में हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस सपने और निर्देशक की सोच का सम्मान करें और अपना सर्वश्रेष्ठ दें। जब दर्शक वही महसूस करने लगते हैं जो किरदार महसूस कर रहा है, तभी असली जादू पैदा होता है। यही हमेशा मेरा लक्ष्य रहता है।”
अपने अटूट समर्पण और गहन तैयारी की प्रक्रिया के साथ शीना चौहान लगातार यह साबित कर रही हैं कि यादगार अभिनय केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि जुनून, अनुशासन और किरदार के प्रति पूर्ण ईमानदारी से जन्म लेता है।


