केवल चिकित्सक नहीं, शोधकर्ता भी बनें होम्योपैथी के विद्यार्थी : डॉ. ए.के. द्विवेदी

इंदौर, 3 अगस्त। एस.के.आर.पी. गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, इंदौर में सोमवार को बीएचएमएस इंटर्न्स के लिए “Research Opportunities after Successful Completion of BHMS” विषय पर करियर मार्गदर्शन व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त होम्योपैथिक चिकित्सक, शोधकर्ता एवं शिक्षाविद प्रो. डॉ. अश्विनी कुमार द्विवेदी (डॉ. ए.के. द्विवेदी) ने विद्यार्थियों को शोध के क्षेत्र में उपलब्ध राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों की विस्तृत जानकारी दी।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आज होम्योपैथी केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा (Evidence-Based Medicine) और नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि भविष्य उसी चिकित्सक का है जो मरीजों का उपचार करने के साथ-साथ नए वैज्ञानिक प्रमाण भी प्रस्तुत करे। उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “आज का चिकित्सक, कल का शोधकर्ता होना चाहिए।”

व्याख्यान के दौरान उन्होंने बताया कि बीएचएमएस के बाद क्लीनिकल रिसर्च, पब्लिक हेल्थ, मेडिकल एजुकेशन, ड्रग प्रूविंग, एपिडेमियोलॉजी, इंटीग्रेटिव मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डिजिटल हेल्थ जैसे अनेक क्षेत्रों में शोध की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), सीएसआईआर, राष्ट्रीय आयुष संस्थानों तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों में उपलब्ध शोध वृत्तियों, फेलोशिप एवं परियोजनाओं की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि एमडी (होम्योपैथी), मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (MPH), एमएससी क्लीनिकल रिसर्च, एपिडेमियोलॉजी, बॉयोस्टैटिसटिक्स, हॉस्पिटल मैनेजमेंट तथा पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उत्कृष्ट करियर विकल्प हैं। साथ ही उन्होंने रिसर्च मेथडोलॉजी, बॉयोस्टैटिसटिक्स, वैज्ञानिक लेखन, रिसर्च एथिक्स, गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस (GCP), डेटा मैनेजमेंट तथा आधुनिक कंप्यूटर एवं रिसर्च सॉफ्टवेयर का ज्ञान विकसित करने पर विशेष जोर दिया।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि शोध कार्य तभी सार्थक होता है जब उसके निष्कर्ष वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हों। उन्होंने विद्यार्थियों को केस रिपोर्ट, मूल शोध लेख, समीक्षा लेख तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ईमानदारी, नैतिकता, मरीज की गोपनीयता और प्लेजरिज्म से बचने को प्रत्येक शोधकर्ता का मूल दायित्व बताया।

कार्यक्रम में इंटर्न्स ने शोध से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. द्विवेदी ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान प्रस्तुत किया। व्याख्यान के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे होम्योपैथी को वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और देश में साक्ष्य-आधारित होम्योपैथी के विकास में अपना योगदान दें।

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